ब्यूरो रिपोर्ट नई दिल्ली

नई दिल्ली – किसान अपनी मांगों को लेकर पिछले 6 महीनें से दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले बैठे हैं। किसान अपनी मांगों पर अड़े हैं तो सरकार अपने फैसलों पर अडिग है। 6 महीनें आंदोलन के पूरे होने पर किसानों ने उस दिन को काला दिवस के रूप में मनाया, उनके इस विरोध में कई राजनीतिक दलों का भी पूरा सहयोग रहा। किसान नेता आंदोलन को फिर से रफ्तार देने में जुट गए हैं। संयुक्त किसान मोर्चा ने शुक्रवार को सिंघु बॉर्डर पर बैठक की। बैठक में सभी बॉर्डर के संगठनो के मुखिया शामिल हुए। बैठक में आये नेताओं ने आंदोलन को तेज करने बात की।

बैठक में आये नेताओं ने कहा कि सरकार किसानों को थकाना चाहती है। सरकार बिल वापसी व समर्थन मूल्य कानून पर कोई बात नही कर रही है। किसानों में सरकार के रुख को देखकर आक्रोश है। बैठक में किसान नेताओं ने प्रस्ताव पास कर 5 जून 2021 को अध्यादेश के 1 साल पूरा होने पर बीजेपी सांसदों/ विधायकों के घर के बाहर कृषि कानूनों की प्रतियां जलाने का निर्णय लिया है। निर्णय हुआ कि जिन जिलों में बीजेपी के सांसद/विधायक नही है वहाँ पर जिलाधिकारी/उपजिलाधिकारी के कार्यालय के बाहर कृषि कानून की प्रतियां जलाकर किसान अपना विरोध दर्ज कराएंगे।

कोविड वैश्विक महामारी के बीच किसानों का आंदोलन सरकार के लिए भी बड़ी चुनौती है। किसान सरकार पर अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं तो वहीं सरकार किसान नेताओं पर किसानों को भ्रमित करने की बात कह रही है। अब देखना होगा 5 जून को बीजेपी के सांसदों/ विधायकों के घर के बाहर कृषि कानूनों की प्रतियां जलाने का जो निर्णय किसानों ने लिया है, उस पर सरकार क्या रुख अपनाती है।

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