हरिद्वार – शुक्रवार को सीएम तीरथ सिंह रावत हरिद्वार दौरे पर रहे। इस दौरान अपनी मांगो को लेकर स्वास्थ्य विभाग के कई कर्मचारी ज्ञापन लेकर सीएम से मिलने पहुँचे। इनमें कई महिला कर्मचारी भी शामिल थी लेकिन पुलिस ने ज्यादातर कर्मचारियों व उनके नेताओं को मुख्यमंत्री से मिलने तक नही दिया गया। मुख्यमंत्री से मिलने के लिए कई महिला कर्मचारी पहले हेलीपैड, मेला अस्पताल और यहाँ तक की मेला नियंत्रण भवन तक पहुँच गई। लेकिन तीरथ सिंह रावत तक उनकी पहुंच नहीं हो पाई। हालाकिं बाद में अधिकारियों के माध्यम से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संगठन और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाएँ उत्तराखंड से जुड़े लोगों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।

चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाएं संगठन के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश लखेड़ा, ऑडिटर महेश कुमार, जिलामंत्री राकेश भँवर ने संयुक्त रूप से कहा कि कर्मचारियों की, कोरोना महामारी में अग्रिम पंक्ति में अपनी जान की परवाह न करते हुए कार्य करने के बाद भी पदोन्नति ना होना, टेक्निकल कार्य करने के बाद भी टेक्निकल न किया जाना संबंधित मांगे है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में माली को टेक्निकल कर उद्यान सहायक बना दिया गया, पशुपालन विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को वेक्सीनेटर बना दिया गया, एक प्रदेश में दो-दो कानून जिसके कारण कर्मचारी मायूस हैं। उनकी मुख्यमंत्री से माँग है कि कर्मचारियों की मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार कर पदोन्नति, पोष्टिक आहार भत्ता, एक माह का मानदेय, जोखिम भत्ता दिया जाए।
वही राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संगठन से जुड़े कर्मचारियों ने भी मुख्यमंत्री से मांग की है कि एक्स कैडर का गठन किया जाए और आउटसोर्सिंग के माध्यम से की जा रही भर्ती को निरस्त कर आज अभी तक भर्ती किए कर्मियों को एनएचएम में समायोजित किया जाए और उनके समान वेतन दिया जाए।

