मयूर सैनी/सचिन कुमार
हरिद्वार – जगद्गुरू शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के ब्रह्मलीन हो जाने के बाद शंकराचार्य पद 17 अक्टूबर को बद्रीनाथ स्थित ज्योतिष्पीठ पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पट्टाभिषेक होना है। लेकिन पट्टाभिषेक से पहले हरिद्वार में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रविंद्रपुरी ने इस कार्यक्रम पर सवाल खड़े किए है। निरंजनी अखाड़े में महंत रविंद्रपुरी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए बताया कि ज्योतिष पीठ पर अविमुक्तेश्वरानंद का होने वाला पट्टाभिषेक नियमों के विपरीत है। महन्त रविंद्रपुरी ने कहा कि किसी भी सन्यासी अखाड़े के साधु संतो को इस समारोह में नही जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस पद पर केवल गिरी नामा और संन्यासी अखाड़े से जुड़े हुए ज्ञानी संत ही आसीन हो सकते है।
अब देखना है इस विरोध के बाद कितने साधु संत इस कार्यक्रम में शामिल होते हैं और इस पूरे बयान पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है।

