हरिद्वार – शांतिकुंज की अधिष्ठात्री श्रद्धेया शैलदीदी के मार्गदर्शन में शांतिकुंज में दक्षिण भारतीय राजपुरोहित परिवार की बहिनों का नौ दिवसीय नारी शक्ति शिविर का आज शुभारंभ हुआ। शिविर का शुभारंभ शांतिकुंज की वरिष्ठ बहिनों ने दीप प्रज्वलन कर किया।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए दीनाबेन त्रिवेदी ने कहा कि नारी भावसंवेदना की मूर्ति है। नारी परिवार, समाज की धुरि है। नारी की अपनी एक विशिष्ट गरिमा है। वह पुरुष की जननी है। नारी स्नेह एवं सौजन्य की देवी है। मानव समाज ईश्वर के बाद नारी की सर्वाधिक ऋणी है। उन्होंने कहा कि किसी राष्ट्र का उत्थान नारी जाति के उत्थान से ही होता है। वर्तमान समाज में व्याप्त कुरीतियों का उन्मूलन नारी के सहयोग के बिना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि नारी की क्षमताओं को समाज की कसौटी पर खरा उतरने का अब समय आ गया है।

गर्भ का अद्भुत ज्ञान विज्ञान विषय पर संबोधित करते हुए डॉ. गायत्री शर्मा ने कहा कि माता बच्चे की जन्मदात्री ही नहीं, निर्मात्री भी होती है। माता गर्भ से ही भावी बच्चे का निर्माण, उसके संस्कार और व्यक्तित्व का निर्माण करके मनचाहे गुणों से युक्त संतान को जन्म देने की क्षमता रखती है। आओ गढ़े संस्कारवान पीढ़ी प्रकोष्ठ की समन्वयक डॉ गायत्री शर्मा ने कहा कि गर्भावस्था में ही बच्चे का मस्तिष्क का ८० प्रतिशत विकास हो जाता है। शिशु का गर्भावस्था के समय ही शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य का निर्माण भी किया सकता है।
इससे पूर्व संगीत विभाग की बहिनों ने नारी जागरण पर संगीत प्रस्तुत किया। नौ दिन चलने वाले इस शिविर में नारी गरिमा, गर्भ का अद्भूत ज्ञान विज्ञान, व्यक्तित्व निर्माण, समस्याएँ आज की समाधान कल की आदि विषयों पर प्रतिभागियों को जानकारी की जायेगी। इस अवसर पर शांतिकुंज एवं दक्षिण भारतीय राजपुरोहित नारी शक्ति शिविर में शामिल बहिनें उपस्थित रहीे।

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