हरिद्वार – वर्ष 2026 गायत्री परिवार की संस्थापिका वंदनीया माताजी भगवती देवी शर्मा का जन्मशताब्दी वर्ष है। शांतिकुंज वर्ष 2026 से पूर्व देश के कोने-कोने में गायत्री, यज्ञ व भारतीय संस्कृति को पहुंचाने के लक्ष्य लेकर चल रहा है। इन्हीं उद्देश्यों को लेकर आगामी दिनों में देश-विदेश के अनेक स्थानों में अश्वमेध गायत्री महायज्ञ, 108, 51, 24 व 9 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का शृंखलाबद्ध आयोजन प्रस्तावित है। इन्हीं कार्यक्रमों के संचालन के लिए शांतिकुंज में केन्द्रीय टोली पुनर्बोध प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया है। इसमें प्रतिभागियों को यज्ञ, संस्कार, भारतीय संस्कृति के विस्तार हेतु विविध विषयों पर विषय विशेषज्ञ मार्गदर्शन देंगे।

पांच दिवसीय इस पुनर्बोध प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ केन्द्रीय जोनल समन्वयक डॉ. ओपी शर्मा, श्री शिवप्रसाद मिश्र आदि वरिष्ठ केन्द्रीय प्रतिनिधियों ने दीप प्रज्वलन कर किया। प्रशिक्षण शिविर के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. ओपी शर्मा ने कहा कि मनुष्य की पहचान उनके वैचारिक शक्ति से होती है। वेदमाता गायत्री की साधना  साधक में शक्ति का संचार करती है। माँ गायत्री मनोयोगपूर्वक साधना में जुटे साधक का  आत्मिक, भौतिक एवं आध्यात्मिक विकास के लिए पथ प्रशस्त करती है। गायत्री धर्म वर्ग, सम्प्रदाय से ऊपर है। अपने पांच दशक से अधिक के अनुभवों का उल्लेख करते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि गायत्री महामंत्र का जप प्रत्येक मनुष्य कर सकता है। संध्या तिवारी ने  नारी को स्वयं की शक्ति को पहचानने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। सुशीला अनघोरे ने युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्यश्री के दिव्य स्वप्न इक्कीसवीं सदी नारी सदी के उद्घोष पर विस्तृत जानकारी दी।

शिविर समन्वयक ने बताया कि पाँच दिन चलने वाले पुनर्बोध शिविर में अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुखद्वय श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी एवं श्रद्धेया शैलदीदी विशेष मार्गदर्शन व आशीर्वचन देंगे। उन्होंने बताया कि मुम्बई में जनवरी २०२४ में अश्वमेध गायत्री महायज्ञ निर्धारित है। अश्वमेध महायज्ञ की तैयारी के हेतु अगले माह कई टोलियाँ रवाना होंगी। प्रशिक्षण शिविर में झारखण्ड, मप्र, गुजरात, दिल्ली आदि राज्यों के चयनित प्रशिक्षक उपस्थित रहे। 

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