हरिद्वार, 27 मार्च – पतंजलि वेलनेस, पतंजलि योगपीठ-2 स्थित बृहद् सभागार योगभवन में आज रामनवमी के पावन अवसर पर योगगुरु स्वामी रामदेव महाराज का 32वाँ संन्यास दिवस मनाया गया। इस अवसर पर स्वामी रामदेव ने कहा कि आज हम तीन-तीन पर्व एक साथ मना रहे हैं। आज राम नवमी भी है, नवरात्रि की पूर्णता भी है और पतंजलि का यशस्वी सन्यास दिवस भी है। उन्होंने सभी देशवासियों को रामनवमी की तथा पतंजलि संन्यासाश्रम के युवा संन्यासियों को उनके संन्यास दिवस की शुभकमानाएँ प्रेषित कीं।

कार्यक्रम में स्वामी रामदेव ने कहा कि हम सभी अपने जीवन में राम के रामत्व की, कृष्ण के कृष्णत्व की, शिव के शिवत्व की, आत्म तत्व की, हिंदुत्व की, वेद तत्व की, सनातन तत्व की व दैवीय संपद की प्रतिष्ठा करें। उन्होंने कहा कि जिसके जीवन में दैवी संपद नहीं है वो हिंदू सनातनी और राम-कृष्ण का वंशधर नहीं है। वो ऋषि ऋषिकाओं की संतान नहीं है।
उन्होंने कहा कि पतंजलि योगपीठ के माध्यम से पिछले 32 वर्षों में हमने शिक्षा, चिकित्सा, अनुसंधान, कृषि, उद्योग, रोजगार, प्रकृति, पर्यावरण, चरित्र निर्माण, राष्ट्र निर्माण, युग निर्माण, वेदधर्म, राष्ट्रधर्म व सनातन धर्म की सेवा में ऐतिहासिक योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि आज शताधिक ट्रस्टों और विभिन्न संगठनों के माध्यम से देश के 600 से अधिक जिलों में 5000 से अधिक तहसीलों में 35 लाख से अधिक गांव में और लगभग पूरी दुनिया के 200 देशों में योग आयुर्वेद और स्वदेशी और सनातन धर्म के प्रतिष्ठा का कार्य भगवान ने पतंजलि से हो रहा हैै।

स्वामी रामदेव ने कहा कि पतंजलि ने अपनी 32 वर्षों की यात्रा में शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि फॉर्मल एजुकेशन बच्चों को बेहतर भविष्य नहीं दे सकती। पतंजलि में हम संस्कारों पर आधारित शिक्षा व्यवस्था, सनातन संस्कृति के मूल मानदंड, मानवीय मूल्यों, जीवन मूल्यों लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों के साथ ऐसे व्यक्तित्व, चरित्र और नेतृत्व घड़ रहे हैं जो पूरे विश्व में एक नया नेतृत्व देने में समर्थ होंगे। इसमें पतंजलि गुरुकुलम्, आचार्यकुलम्, पतंजलि विश्वविद्यालय और भारतीय शिक्षा बोर्ड इसकी बहुत बड़े सशक्त माध्यम बने हैं।

पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने स्वामी रामदेव को 32वें संन्यास दिवस की शुभकमानाएं दीं। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भगवान राम की जो उदात्तता है, मर्यादा है, उनकी जो व्यापकता है, स्वीकार्यता है उसकी आज विश्व जनमानस में आवश्यकता है। उनके चरित्र व जीवन के प्रत्येक आयाम से हम बहुत कुछ समझ और सीख सकते हैं। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि श्रद्धेय स्वामी जी महाराज वर्तमान युग में उसी परंपरा के संवाहक हैं। उन्होंने कहा कि हमें गौरव होता है कि स्वामी रामदेव जीवंत विग्रह के रूप में उन मर्यादाओं की पुनर्स्थापना के लिए अहर्निश प्रयासरत हैं। उनका जीवन और जीवन में उनका संघर्ष दोनों ही अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि हम सब सौभाग्यशाली हैं कि स्वामी रामदेव के साथ हमें सहयोगी की तरह कुछ करने का भगवान ने हमें निमित्त बनाया। आज पतंजलि परिवार के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन है कि संन्यास परंपरा की गौरवशाली विधा को स्वामी रामदेव ने स्वयं अंगीकार करके एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है और उसी परंपरा में आज कई सौ पूज्य संन्यासी भाई, पूज्या साध्वी बहनें उस परंपरा और उस मर्यादा का अनुकरण और अनुसरण करते हुए इस सनातनी संस्कृति की पुनर्स्थापना के लिए प्रयासरत हैं।

कार्यक्रम में भारतीय शिक्षा बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष एन.पी. सिंह ने कहा कि यदि श्री राम धर्म के विग्रह हैं तो पूज्य स्वामी रामदेव 21वीं सदी में श्री राम के साक्षात विग्रह हैं। उन्होंने कहा कि श्री राम मात्र हमारे आध्यात्मिकता के केंद्र बिंदु नहीं हैं, मात्र हमारी सामाजिक सांस्कृतिक धरोहरों की जीवंतता को बरकरार रखने वाले प्रतीक नहीं हैं अपितु राम सनातन रूप से आने वाली सभी सहस्त्राबियों के लिए भारत ही नहीं विश्व के लिए एक मानक व्यक्तित्व के रूप में प्रेरणा स्त्रोत व मार्गदर्शक रहेंगे। सिंह ने कहा कि स्वामी रामदेव भारतीय संस्कृति की पुनर्स्थापना व उसकी वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठा के बहुत ही समर्थ, संवाहक व्यक्तित्व हैं। उन्होंने पतंजलि संन्यासाश्रम के सभी युवा संन्यासी भाईयों और संन्यासनी बहनों को प्रणाम करते हुए उनके संन्यास दिवस की शुभकामनाएँ दीं।

कार्यक्रम में पतंजलि संन्यासाश्रम के सभी संन्यासीगण, पतंजलि योगपीठ से सम्बद्ध सभी ईकाइयों के ईकाई प्रमुख, अधिकारी, कर्मचारी, शिक्षण संस्थानों के प्राचार्य, आचार्य व विद्यार्थीगण उपस्थित रहे।

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