कुंभ मेले को लेकर सरकार के फैसले का संयुक्त व्यापार मंडल ने विरोध किया है, सरकार ने 1 से 30 अप्रैल के बीच कुंभ मेले की समय सीमा तय की है। व्ययपरियों का आरोप है कि उत्तराखंड सरकार व्ययपरियों के साथ भेद भाव कर रही है। जबकि कई अन्य राज्यों में सरकार मेले का आयोजन कर रही है जहां हज़ारों लाखों लोग पहुंच रहे हैं वहां कहाँ कोरोना है।

व्यापारी नेता संजीव चौधरी ने कहा कि सरकार कोरोना के बाद से लगातार व्यापारियों की अनदेखी कर रही है। व्यापारी परेशान है, उनके रोजगार चौपट हो गई है, व्ययपरियों को कुंभ से बड़ी उम्मीद थी लेकिन सरकार कुंभ को लेकर भी इतने सख्त नियम बना दिया है जिससे श्रद्धालु हरिद्वार न आये। संजीव चौधरी ने कहा कि समस्त व्यपारी 21 फरवरी को सार्वजनिक रूप से धरना देंगे, अगर सरकार ने कुंभ मेले के लिये बनाये कानून को नहीं बदलती तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

वहीं व्यपारी नेता संजय चोपड़ा ने कहा कि सरकार व्ययपरियों की सुध नहीं ले रही है। कई बार वार्ता करने के बाद भी सरकार ने उनकी मांगों पर धयान नहीं दे रही है, इसलिये मजबूर होकर आंदोलन की राह पकड़नी पड़ी है। अगर सरकार फिर भी नहीं मानी तो व्यापारी धरना प्रदर्शन के साथ मंत्री और नेताओं का घेराव करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को किसी भी हालत में एसओपी वापस लेनी पड़ेगी।

व्यापारी नेता प्रदीप चौधरी ने कहा कि बिहार, पंजाब में चुनाव हो गए, यूपी में माघ मेला सरकार ने कराई लेकिन वहां कोरोना नहीं है। लेकिन हरिद्वार में कुंभ जो इतना बड़ा तयोहार है सरकार उसकी अनदेखी कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार आखिर हरिद्वार के साथ सौतेला व्यवहार क्यों कर रही है। प्रदीप चौधरी ने कहा कि अब भी सड़कों का निर्माण हो रहा है, उसमे भी बड़ी अनियमित बरती जा रही है। एक बरसात के बाद हरिद्वार की जनता देखेगी सड़कों का क्या हाल होगा। सरकार हरिद्वार के व्यापारियों, टेक्सी चालकों, होटल संचालकों के साथ ही हरिद्वार की जनता के साथ धोका कर रही है। उन्होंने लोगों से समर्थन भी मांगी। प्रदीप चौधरी ने कहा कि सरकार को हरिद्वार की भावनाओं को समझना चाहिये और हरिद्वार कुंभ को भव्य और दिव्य कराना चाहिये।

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