हरिद्वार – धर्मनगरी हरिद्वार में कुम्भ मेले का आगाज हो गया है। सभी अखाड़े अपनी-अपनी तैयारी में जुट गए है। निरंजनी अखाड़े की भव्य पेशवाई के बाद बुधवार को जूना अखाड़े ने भी अपनी धर्मध्वजा की स्थापना की। इस बार हरिद्वार महाकुंभ मेले में किन्नर अखाड़ा मुख्य आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। किन्नर अखाड़ा जूना अखाड़े के साथ मिलकर कुम्भ मेले की सभी गतिविधियों में साथ है। नगर भ्रमण से लेकर धर्मध्वजा की स्थापना में किन्नर अखाड़ा जूना अखाड़े के साथ नजर आ रहा है। बुधवार को धर्मध्वजा की स्थापना के साथ किन्नर अखाड़े से जुड़े संतो ने गँगा तट पर पूजा अर्चना की। इस दौरान किन्नर अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने बताया कि किन्नर अखाड़ा जूना अखाड़े के साथ मिलकर कुम्भ मेले की पेशवाई में शामिल होगा। किन्नर अखाड़े में महिला पुरुष सभी तरह के लोग शामिल है। हर बार की तरह इस कुम्भ में भी किन्नर अखाड़े में पीठाधीश्वर और महामंडलेश्वर बनाये जाएंगे। हरिद्वार कुम्भ में कई किन्नरों को महामंडलेश्वर बनाया जाएगा। किन्नर अखाड़े में महिला पुरुष सभी तरह के संत और साध्वी शामिल है। जिस तरह से महादेव समान लैंगिकता को चाहते थे उसी तरह से किन्नर अखाड़ा भी चाहता है कि समाज मे उन्हें अलग निगाहों से न देखा जाए। उनका एक ही उद्देश्य है कि देश दुनिया मे सनातनी धर्म का प्रचार प्रसार हो और इसके लिए युवा पीढ़ी को भी जाति, धर्म भुलाकर सनातनी धर्म को समझना और इसका प्रचार प्रसार करना चाहिए।

वही किन्नर अखाड़ा महाराष्ट्र की महामंडलेश्वर पायल नन्दगीरी ने बताया कि वो हमेशा चाहती थी कि माँ बाप का घर छोड़कर वो रेणुका माता की उपासना करने लगी उनका यही उद्देश्य था कि सनातन धर्म का प्रचार प्रसार कैसे हो। इसलिए साल 2013 में किन्नर अखाड़े की स्थापना की गई और अखाड़े से जुड़े सभी लोग सनातनी धर्म की स्थापना में जुड़ गए। वही उन्होंने ये भी कहा कि जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक हरिगिरि महाराज ने जो सम्मान उन्हें दिया है उसके वो सदा आभारी रहेंगे।

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