हरिद्वार – हरिद्वार महाकुंभ में कई साधु संत आकर्षण का केंद्र बने हुए है। ऐसे ही एक संत है वीरेंद्रानंद गिरी महाराज, जो हाल ही में जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर बने है। वीरेंद्रानंद गिरी महाराज एसएससी पीएचडी पढ़े हुए है। वीरेंद्रानंद गिरी महाराज पाल वंश के राजा है लेकिन राजकाज छोड़कर संत का जीवन अपना लिया और समाज के उत्थान में निकल पड़े।

साल 2006 में राजकीय प्रिंसीपल की नौकरी में वीरेंद्रानंद ने पहाड़ी क्षेत्रों में शिक्षा के क्षेत्र में विशेष काम किया है। हरिद्वार स्थित अपने आश्रम में प्रेस वार्ता कर उन्होंने शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में किये गए कामो को गिनवाया। उन्होंने बताया कि हरिद्वार में भी वो एक बड़ा स्कूल खोलने जा रहे है। जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर बनने के बाद उन्होंने अपने गुरु से एक ही गोपनीय मंत्र लिया है कि वो आजीवन शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ ही सनातन धर्म की सभ्यता और संस्कृति को बढ़ावा देने का काम करेंगे। हरिद्वार में वो अपने स्कूल का नाम वो द एशियन स्कूल रखेंगे जिसमे हरिगिरि महाराज का नाम भी जोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरी महाराज ने उन्हें महामंडलेश्वर की दीक्षा के दौरान यही गुरुमंत्र दिया कि वो आजीवन शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ा काम करेंगे।

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि साल 2006 में उन्होंने राजकीय प्रिंसिपल की नौकरी छोड़कर शिक्षा के क्षेत्र में सीमांत क्षेत्रों में उन्होंने द एशियन स्कूल के नाम से कई स्कूल खोले हैं। आज उन्हें गर्व होता है कि 7 साल में उन्होंने 55 एमबीबीएस 22 आईआईटी और 20 एनडीए और 6 इंटरनेशनल बॉक्सिंग खिलाड़ी पहाड़ से दिए हैं। उन्हें बड़ा गर्व महसूस होता है जब इन छात्रों के परिजन उनसे मिलते है।
इसके साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि कोरोना के नियमो का ध्यान रखते हुए हरिद्वार महाकुंभ मेला दिव्य भव्य सम्पन्न होगा।

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