हरिद्वार – सनातन धर्म में अभी तक 13 अखाड़ों को ही मान्यता मिली है और इन 13 अखाड़ों से मिलकर ही अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का गठन हुआ था। देश मे चारो स्थानों पर लगने वाले महाकुंभ मेले में अखाड़ा परिषद ही सभी धार्मिक गतिविधियों को देखता है। लेकिन इस बार 2021 के हरिद्वार महाकुंभ मेले में किन्नर अखाड़ा लोगो के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। किन्नर अखाड़े को जूना अखाड़ा ने मान्यता दी है और महाकुंभ में जूना अखाड़े के साथ ही नगर प्रवेश और धर्मध्वजा स्थापना के साथ ही पेशवाई में भी शामिल होता आया है।
कब हुई थी किन्नर अखाड़े की स्थापना
2013 में किन्नर अखाड़े की स्थापना की गई थी। किन्नर अखाड़े में सबसे प्रमुख पद पर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी विराजमान है। लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी का कहना है कि किन्नरों को समाज की मुख्य धारा में लाने और उन्हें समान अधिकार दिलाने के उद्देश्य से ही किन्नर अखाड़े का गठन किया गया। लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी का कहना है की सनातन धर्म का प्रचार प्रसार करना ही उनका मुख्य धर्म है।
हरिद्वार महाकुंभ में क्यों है खास किन्नर अखाड़ा और आकर्षण का क्यों बना है केंद्र
स्थापना के बाद किन्नर अखाड़े ने उज्जैन और प्रयागराज कुम्भ में भी भाग लिया था लेकिन हरिद्वार महाकुंभ में किन्नर अखाड़ा मुख्य आकर्षण का केन्द्र बना। किन्नर अखाड़े की महाराष्ट्र की महामंडलेश्वर पायल नन्दगीरी ने बताया कि हरिद्वार महाकुंभ में उनके साथ 50 महामंडलेश्वर और बड़ी संख्या में साधु संत शामिल हो रहे है। 11 मार्च को जूना अखाड़े के साथ वो शाही स्नान में भी भाग लेंगे।
आखिर किन्नरों के अलावा और किन लोगों को मिलती है किन्नर अखाड़े की सदस्यता
किन्नर अखाड़े की पवित्रानंद गिरी बताती है कि किन्नर अखाड़े में किन्नरों के अलावा महिलाएं भी शामिल है। महिलाओं को भी महामंडलेश्वर की उपाधि दी जाती है। हरिद्वार कुम्भ में 50 से अधिक महामंडलेश्वर शामिल हो रहे है। इसके साथ ही उनके अखाड़े में बड़ी संख्या में मुस्लिम किन्नर भी शामिल है लेकिन उन सबका धर्म परिवर्तन कराकर ही पूरे विधि विधान के साथ ही मुस्लिम किन्नरों को अखाड़े की सदस्यता दिलाई जाती है।
किन्नर अखाड़े को लेकर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और महामंत्री में आखिर क्यों हो गया था मतभेद
हरिद्वार महाकुंभ से पहले अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी और महामंत्री हरिगिरि महाराज में किन्नर अखाड़े को लेकर आपस में मतभेद हो गया था प्रयागराज में अपने एक बयान में नरेंद्र गिरी महाराज ने कहा था कि हरिद्वार कुम्भ में केवल 13 अखाड़े ही भाग लेंगे बाकी कोई अखाड़ा नही है, उन्होंने किन्नर अखाड़े समेत कई अखाड़ों को फर्जी तक कह दिया था। लेकिन हरिगिरि महाराज ने किन्नर अखाड़े को जुबान दे दी थी कि वो उन्हें जूना अखाड़े के साथ रखेंगे और कुम्भ की सभी गतिविधियों में शामिल करेंगे। हालांकि नरेंद्र गिरी महाराज अब इस मामले पर ज्यादा कुछ बोल नहीं रहे हैं लेकिन वह अभी भी इस बात पर अटल है कि देश में तेरह अखाड़े ही है। अखाड़ा परिषद में किसी अन्य अखाड़े को जगह नहीं मिल सकती है। आदि गुरु शंकराचार्य ने तेरह अखाड़ो की स्थापना सनातन धर्म की रक्षा और प्रचार प्रसार के लिए बनाए थे और आजीवन तेरह अखाड़े ही रहेंगे जो कुम्भ का आयोजन करेंगे।
जूना अखाड़े की पेशवाई में किन्नर अखाड़ा आम लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा
हरिद्वार में 5 मार्च को निकली जूना अखाड़े की पेशवाई में किन्नर अखाड़ा मुख्य आकर्षण का केंद्र बना रहा। हरिद्वार के पांडेवाला से शुरू हुई पेशवाई में किन्नर अखाड़े ने सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। हाथ मे तलवार लिए ऊंट पर सवार, बुलेट और रथ पर सवार किन्नर संतो को देखने के लिए लोगो का हुजूम उमड़ पड़ा। ज्यादातर लोगों का ध्यान सिर्फ किन्नर अखाड़े पर रहा। हर कोई उनके साथ सेल्फी और वीडियो बनाने में व्यस्त दिखाई दिया। पेशवाई के बाद अखबार, टीवी चैनलों और सोशल मीडिया में भी किन्नर अखाड़ा छाया रहा। यही कारण है कि लालताराव पुल के पास बनी किन्नर अखाड़े की छावनी में बड़ी संख्या में लोग अखाड़े के साधु संतों से मिलने पहुँच रहे है।

