हरिद्वार – महाकुम्भ के दौरान अखाड़ो में कोरोना महामारी को लेकर आरोपो का दौर शुरू हो गया है। बैरागी अखाड़ो ने सन्यासी अखाड़ो पर कोरोना के संक्रमण को फैलाने का आरोप लगाया है। दिगंबर आणि अखाड़े के महंत और पूर्व अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता बाबा हठयोगी ने कहा कि सन्यासी अखाड़ो ने अपने स्वार्थ के चलते लोगों को इस महामारी में झोकां है। जब 11 अप्रैल 2022 तक बृहस्पति कुंभ राशि में है और 14 अप्रैल 2022 को मेष राशि में सूर्य आ रहा है तो ऐसे में क्या जल्दी थी जो इस महाकुंभ का आयोजन किया गया। इस महामारी से बचने के लिए इस वर्ष सांकेतिक स्नान भी किया जा सकता था और हालात अगर अच्छे हो जाते तो 2022 में दिव्य और भव्य कुंभ का आयोजन किया जा सकता था। बाबा हठयोगी ने आरोप लगाते हुए कहा कि सन्यासी अखाड़ो की जिद और उनके स्वार्थ के कारण ही कुंभ नगरी में लोग कोरोना की चपेट में आ रहे है। इन हालातों को लेकर अखाड़ा परिषद की भी नाकामी सामने आई है।
निरंजनी अखाड़े के 17 अप्रैल को समापन की घोषणा पर बाबा हठयोगी ने कहा कि यह निरंजनी अखाड़े का अपना निजी फैसला है। बैरागी अखाड़े अपनी परंपरा के अनुसार चैत्र पूर्णिमा का स्नान करने के बाद कुंभ का समापन करेंगे।
एक ओर बैरागी अखाड़े सन्यासी अखाड़ों पर हरिद्वार नगर को कोरोना ग्रस्त बनाने का आरोप लगा रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर निरंजनी अखाड़े की पहल का विरोध कर उन्हें माफी मांगने को भी कह रहे हैं। खुद बैरागी 27 तारीख के स्नान को लेकर तैयारी करने के साथ ही कुंभ मेला तिथि को 30 अप्रैल तक करने की बात कर रहे हैं। अब सवाल ये है कि आखिर संत समाज को जब कोरोना कि इतनी ही फिक्र थी तो क्यों अखाड़ा परिषद के नेतृत्व में सभी अखाड़ों ने वर्ष 2021 में ही कुंभ कराने की ठानी।

