हरिद्वार, 08 अप्रैल – आयुर्वेद को वैश्विक पहचान दिलाने और भारतीय ज्ञान-परंपरा के संरक्षण में निरंतर कार्य कर रहे आचार्य बालकृष्ण को एक और अंतरराष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया है। नेट ग्रीन फाउंडेशन की ओर से आयोजित अर्थ अवार्ड एंड हाई इंपैक्ट सस्टेनेबिलिटी डायलॉग 2026 के अंतर्गत उन्हें ‘विश्व आयुर्वेद रत्न’ से अलंकृत किया गया। यह समारोह यूनेस्को हाउस नई दिल्ली में आयोजित हुआ। जिसमें देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्व मौजूद रहें। आचार्य बालकृष्ण इस कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने इस सम्मान को आयुर्वेद की उस महान परंपरा को समर्पित किया जो हजारों वर्षों से मानवता के समग्र स्वास्थ्य और संतुलित जीवन का मार्ग प्रशस्त करती आई है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान किसी व्यक्ति का नहीं बल्कि उस समृद्ध भारतीय परंपरा का है, जिसने ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के सिद्धांत को जीवन में उतारा।

कार्यक्रम में दिल्ली सरकार के पर्यावरण, वन एवं वन्य जीव मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा तथा यूनेस्को की प्राकृतिक विज्ञान इकाई के प्रमुख डॉ. बेन्नो बोएर सहित कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और नीति-निर्माता उपस्थित रहे। इस अवसर पर सभी अतिथियों ने आयुर्वेद और सतत विकास के बीच गहरे संबंध पर विचार साझा किए।

नेट ग्रीन फाउंडेशन: सतत विकास का वैश्विक मंच
नेट ग्रीन फाउंडेशन एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जो पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, सतत विकास और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए कार्य करती है। संस्था का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर ऐसे प्रयासों को पहचान देना है, जो प्रकृति और मानव के बीच संतुलन स्थापित करें। अर्थ अवार्ड इसी पहल का हिस्सा है, जहां विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वालों को सम्मानित किया जाता है।

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