देहरादून – उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत केंद्रीय नेतृत्व की पहली पसंद बने हैं। त्रिवेंद्र सिंह रावत के रिप्लेसमेंट की के रूप में कई नामों पर चर्चा के बाद पार्टी ने तीरथ को उत्तराखंड की कमान सौंपी है। मीडिया रिपोर्ट में मुख्यमंत्री की दौर में कई नाम सामने आए पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी, सांसद अजय भट्ट के साथ प्रदेश के कई मंत्री और विधायक इस रेस में मंत्री सतपाल महाराज, मंत्री धन सिंह रावत, विधायक पुष्कर सिंह धामी समेत कई नाम शामिल रहे।

तीरथ सिंह रावत के मुख्यमंत्री की शपथ लेते ही उनके मंत्रिमंडल को लेकर चर्चाएं भी तेज़ हो चली हैं। मुख्यमंत्री के साथ किसी भी मंत्री को सपथ नहीं दिलाई गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्दी ही नए मंत्रिमंडल का विस्तार हो जाएगा। सूत्रों की माने तो तीर्थ सिंह रावत के मंत्रिमंडल में कुछ नए चेहरे शामिल होंगे। इसका मतलब साफ है कि कुछ पुराने मंत्रियों की कुर्सी खतरे में है। यही वजह है कि कई लोग देहरादून से दिल्ली तक अपने केंद्रीय नेतृत्व के दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं।

मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री के साथ 12 लोग शामिल होंगे। पूर्व की त्रिवेंद्र मंत्रिमंडल में लंबे समय से तीन मंत्रियों के पद खाली चल रहे थे। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद मंत्रियों के तीन पदों को भरा नहीं जा सका था। वजह आपसी खींचतान और कई नेताओं की आपसी जोरआजमाइश भी रही। हालांकि तीर्थ सिंह रावत के मंत्रिमंडल में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि मंत्रियों के सभी पदों की ज़िमेदारी लोगों को दी जाएगी। तीन नए मंत्री तो बनेंगे ही, मुख्यमंत्री के अलावा आठ पुराने मंत्रियों में से कुछ चेहरों को ड्रॉप भी किया जा सकता है।

प्रदेश में नए समीकरण की वजह से मंत्रिमंडल में जगह बनाए रखने के लिए सभी मंत्री ऐड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। देहरादून से दिल्ली तक हर संपर्क के सहारे नेता अपनी कुर्सी बचाने की जुगत में हैं। वहीं कई लोग आरएसएस की शरण में पहुंच गए हैं ताकि किसी तरह से उनकी नईया पार लग सके। प्रदेश में इसी खींचतान की वजह से कोई मंत्री तीरथ सिंह रावत के साथ शपथ नहीं ले सका। अब मंत्रिमंडल का शपथ अलग से होगा। अब सबकी नजरें नए मंत्रिमंडल पर टिकी है कि वो कौन से नए चेहरे होंगे जिनको तीर्थ की टीम में जगह मिलेगी!

नए मंत्रिमंडल में तीरथ सिंह रावत को सभी समीकरण साधने होंगे। गढ़वाल-कुमाऊं, पहाड़-मैदान के साथ ही नए लोगों के साथ अनुभवी चेहरों को भी अपनी टीम में जगह देनी होगी। जिलों में भी संतुलन बनाना जरूरी होगा, कई जिले ऐसे हैं, जिनका लंबे समय से मंत्रिमंडल में जगह नहीं रहा। वजह साफ है अपने प्रभाव और जुगाड़ की वजह से एक ही जिले से एक से ज्यादा वयक्ति मंत्रिमंडल में जगह बना लेते हैं।

अब देखना होगा की तीरथ सिंह रावत कैसे सारे समीकरण को साधते हुए अपनी टीम का गठन करते हैं।

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