हरिद्वार – धर्मनगरी हरिद्वार में माँ के अनेक मंदिर है। इन मंदिरों में सालो भर भत्तों का ताता लगा रहता है। वहीं माँ चंडी देवी मंदिर में श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए दूर दूर पहुंचते हैं। हरिद्वार के नील पर्वत पर स्थित चंडी देवी मंदिर में माँ भगवती खम्ब रूप में विराजमान है। पावन नवरात्रों के दिनों में मंदिर की अलग ही छठा देखने को मिलती है।

नील पर्वत पर स्थित चंडी देवी मंदिर का इतिहास पौराणिक है। मान्यताओं के अनुसार प्राचीन काल में शुम्भ-निशुम्भ और चंड-मुंड जैसे राक्षसों ने तीनों लोकों में प्रलय मचाया हुआ था। तब सिंहासन छीन जाने के बाद इंद्र आदि देवताओं ने माँ भगवती का आह्वान किया और मां से सभी राक्षसों से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की। देवताओं की विनती पर माँ भगवती ने चंडी का रूप धर कर सभी राक्षसों का वध कर उन्हें राक्षसों के अत्याचारों से मुक्ति दिलाई। देवताओं के आह्वान पर ही मां भगवती चंडी देवी के रुप में हरिद्वार के नील पर्वत पर खम्ब के रूप में विराजमान हो गई।
महंत रोहित गिरी, महंत, चंडी देवी मंदिर

प्राचीन काल से मां चंडी देवी अपने भक्तों का कल्याण करती चली आ रही है। मान्यता है कि जो कोई भी भक्त सच्चे मन से मंदिर में शीश नवाता है, माँ चंडी उसकी मुरादें पूरी करती हैं। ऐसे अनेकों भक्त हैं जो बनाते हैं की उनकी मनोकामनाएं पूरी होने के बाद वह दोबारा मां चंडी के दर्शन करने के लिए आए और माता का आशीर्वाद लिया।

नील पर्वत पर स्थित चंडी देवी मंदिर पहुँचने वाले भक्त तीन किलोमीटर पैदल चढ़ाई चढ़कर मंदिर में पहुंचते हैं, वहीं कुछ भक्त रोपवे के जरिए भी मंदिर में दर्शन करने के लिए आते हैं। नवरात्रों के दिनों में मंदिर परिसर में भजन कीर्तन और भंडारे चलते रहते हैं।

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