हरिद्वार – धर्मनगरी हरिद्वार में कुम्भ मेले की तैयारी जोरों पर है। सभी तेरह अखाड़ो के साधु संतों ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। सभी तेरह अखाड़ों में धर्मध्वजा की स्थापना का विशेष महत्व है। जिस लकड़ी में ये धर्मध्वजा लगाई जाती है उसकी लकड़ी मेला प्रशासन ने सभी तेरह अखाड़ों को सौंप दी है। धर्मध्वजा की लकड़ी के चयन से लेकर स्थापना करने तक की एक लंबी प्रक्रिया होती है जिससे निकलकर अखाड़ो में लकड़ी पहुँच गई है। निरंजनी, जूना, बैरागी समेत सभी तेरह अखाड़ो में स्थापना दिवस एक उत्सव के रूप में मनाया जाएगा।
निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रविन्द्रपुरी महाराज ने बताया कि निरंजनी अखाड़े में 27 फरवरी को धर्मध्वजा की स्थापना की जाएगी। इसके लिए लायी गयी लकड़ी को गेरुए से रंगा जाएगा। जिस प्रकार से पूरा देश राष्ट्रीय तिरंगें को राष्ट्रीय पर्व पर फहराता है उसी प्रकार प्रचीन काल से कुम्भ मेले में धर्मध्वजा की स्थापना की जाती है। इसके लिए उनके अखाड़े के लिए प्रयागराज में विशेष प्रकार का कपड़ा मंगाया जाता है। क्रेन की सहायता से 100 फ़ीट ऊंची लकड़ी को खड़ा किया जाता जिस पर ये धर्मध्वजा लगाई जाती है।


वही जूना अखाड़े में भी धर्मध्वजा स्थापना उत्सव की तैयारी जोर शोर पर है। जूना अखाड़े के अंतराष्ट्रीय संरक्षक हरिगिरि महाराज का कहना है कि धर्मध्वजा स्थापना के साथ ही कुम्भ मेले का आगाज हो जाता है। धर्मध्वजा की लकड़ी का चयन से लेकर स्थापना तक का एक विधि विधान से होता है, जिसके अनुसार पहले पेड़ की पूजा की जाती है फिर उसे काटकर अखाड़ों में लाया जाता है फिर गेरुए रंग से रंगकर उसे स्थापित किया जाता है।


गौरतलब है कि इस बार हरिद्वार कुम्भ मेले पर कोरोना का ग्रहण भले ही लग गया हो लेकिन अखाड़ों से जुड़े साधु संत फिर भी खासे उत्साहित है और इन विपरीत परिस्थितियों में भी उनका उत्साह कम होता नजर नही आ रहा है।

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