हरिद्वार – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर 5 अखाड़ों के साधु संतों ने कुम्भ समापन की घोषणा का विरोध किया है। शंकराचार्य परिषद के अध्यक्ष स्वामी आनंद स्वरूप और जगद्गुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कुम्भ समापन की घोषणा को गलत बताया। स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि किसी एक संत की घोषणा पर कुम्भ समाप्त नही होता। कुम्भ प्राकृतिक है, ग्रह नक्षत्र के आधार पर कुम्भ मेले का आयोजन होता है।
वही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि कुम्भ का मजाक बनाकर रख दिया है। जहां अमृत की बूंदे गिरी थी वहां कुम्भ होता है। ग्रह नक्षत्र बदलने की क्षमता न तो किसी संत में है और न ही किसी अखाड़े में है इसलिए उनकी माँग है कि कुम्भ मेले को ऐसे ही चलता रहने दे और कुम्भ मेले में आने वाले सभी लोग कोरोना गाइडलाइंस का पालन करें।

