हरिद्वार – महाशिवरात्रि पर सातो सन्यासी अखाड़ों द्वारा शाही स्नान किया जाएगा। इसको लेकर शासन और मेला प्रशासन द्वारा तमाम तरह की तैयारियां की जा रही है। सरकार ने अभी तक कुंभ मेले को लेकर नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है। मगर सन्यासी अखाड़े अपनी परंपरा के अनुसार एक अप्रैल से पहले के सभी शाही स्नान करेंगे। इसको लेकर उत्तराखंड के शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने निरंजनी अखाड़े पहुंचकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि से मुलाकात की और सन्यासी अखाड़ों द्वारा किए जाने वाले महाशिवरात्रि के शाही स्नान पर चर्चा की।
महाशिवरात्रि के शाही स्नान को लेकर अखाड़ा परिषद अध्यक्ष से मुलाकात करने पहुंचे शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि 11 मार्च महाशिवरात्रि के शाही स्नान की तैयारी पूरी कर ली गई है। अखाड़ों द्वारा भी अपनी तैयारियां की जा रही है। शाही स्नान के बाद हर की पौड़ी ब्रह्मकुंड में श्रद्धालुओं को स्नान करने की अनुमति नहीं होती है। उसके बाद और पहले ही श्रद्धालु गंगा स्नान कर सकते हैं। कुंभ मेले का पहला शाही स्नान भव्य और दिव्य तरीके से होगा। सभी अखाड़े अपनी छावनियों में प्रवेश कर रहे हैं। और यह काफी खुशी का माहौल है। कुंभ को लेकर नोटिफिकेशन जारी होने के बाद शासन और मेला प्रशासन द्वारा भारत सरकार की गाइडलाइन का पालन कराया जाएगा और रजिस्ट्रेशन में आ रही दिक्कतों को भी दूर किया जाएगा।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि महाराज ने कहा कि उत्तराखंड के शहरी विकास मंत्री द्वारा सभी अखाड़ों में 11 मार्च महाशिवरात्रि के शाही स्नान की व्यवस्था को लेकर चर्चा की जा रही है। उनके द्वारा मंत्री जी को सभी व्यवस्थाओं से अवगत कराया गया है। शाही स्नान के वक्त सफाई व्यवस्था की जाए। सभी अखाड़ों का शाही स्नान का समय निर्धारित है, उसको लेकर शासन और मेला प्रशासन पूरी व्यवस्था करें। कुंभ के पहले शाही स्नान को लेकर अखाड़ों द्वारा भी सभी तैयारियां की जा रही है। 2 अखाड़ों की अभी पेशवाई बाकी है 11 मार्च के शाही स्नान पर सभी अखाड़े अपने-अपने कर्म से भव्य रुप से शाही स्नान करेंगे।
श्री पंचायती निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रवींद्र पुरी का कहना है कि मंत्री मदन कौशिक से हमारी वार्ता हुई है। कुंभ के पहले शाही स्नान में कितने महामंडलेश्वर होगे कितने नागा सन्यासी शाही स्नान में जाएंगे उनकी सभी व्यवस्था को लेकर चर्चा की गई है। इसको लेकर रविंद्रपरी का कहना है कि इसको लेकर शासन और मेला प्रशासन से सभी अखाड़ों की वार्ता हुई थी। श्रद्धालु शाही स्नान के वक्त अलग घाटों पर स्नान करेंगे मगर शाही स्नान के वक्त ब्रह्मकुंड पर श्रद्धालु स्नान नहीं करेंगे।

