लखनऊ, 30 मार्च – उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि परिश्रम का कोई विकल्प नहीं होता। परिश्रमी ही आगे बढ़ता है और स्कॉलरशिप इसमें सम्बल का कार्य करती है। स्कॉलरशिप विद्यार्थियों की मंजिल नहीं, बल्कि परिश्रम उनकी मंजिल है। उत्तर प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2025-26 में 67 लाख विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप उपलब्ध कराते हुए इस वित्तीय वर्ष के लिए पूरी योजना यहाँ सम्पन्न हो रही है। छात्र-छात्राओं को स्कॉलरशिप इसलिए प्रदान की गई है कि वे अधिक मेहनत कर सकें। यह स्कॉलरशिप उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए एक प्लेटफॉर्म और राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा योग्य बनने का एक माध्यम है। मुख्यमंत्री आज यहां वंचित एवं कमजोर वर्ग के कक्षा-9 एवं कक्षा-10 तथा दशमोत्तर के 27,99,982 छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में 3,350 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति तथा राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के अन्तर्गत गरीब परिवारों के मुख्य अर्जक की मृत्यु होने पर 33,334 आश्रित लाभार्थियों को 100 करोड़ रुपये की धनराशि का डी0बी0टी0 के माध्यम से अन्तरण करने के उपरान्त आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रमाण-पत्र तथा राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के पात्र परिवारों को भुगतान प्रमाण-पत्र प्रदान किए।

मुख्यमंत्री ने सभी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्राप्त होने पर बधाई देते हुए कहा कि जब सेवा संवेदना का हिस्सा बनती हैं, और किसी भी सरकार का लक्ष्य व्यक्ति, जाति अथवा सम्प्रदाय विशेष का विकास न होकर ‘सबका साथ सबका विकास’ होता है, तो उसके परिणाम भी इसी रूप में सामने आते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ‘सबका साथ सबका विकास’ का यह प्रेरणादायी मंत्र बिना भेदभाव सभी समुदायों के छात्र-छात्राओं को स्कॉलरशिप से जोड़ता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार की पहले दिन से ही यह मंशा रही है कि अनुसूचित जाति/जनजाति के शत-प्रतिशत छात्र-छात्राओं, पिछड़ी जाति के छात्र-छात्राओं, सामान्य वर्ग के अति गरीब छात्र-छात्राओं और अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए एक प्लेटफॉर्म उपलब्ध हो और उन्हें स्कॉलरशिप समय पर मिल सके। इसी सम्बन्ध में हमने अपनी कार्यवाही को आगे बढ़ाया है। पहले इस व्यवस्था में अनेक कमियां थीं। वर्ष 2016-17 में अनुसूचित जाति/जनजाति के छात्रों को स्कॉलरशिप नहीं दी गयी थी। उस समय प्रदेश के पास इसके लिए धनराशि ही नहीं थी। केन्द्र सरकार से अनुसूचित जाति/जनजाति के छात्रों के लिए जो धनराशि स्कॉलरशिप के लिए मिली थी, उसे अन्य कार्यां में खर्च कर दिया गया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में हमारी सरकार बनने पर हमने वर्ष 2017-18 के साथ ही, वर्ष 2016-17 के विद्यार्थियों को एक साथ छात्रवृत्ति दी। यह प्रसन्नता का विषय है कि आज प्रदेश में अनुसूचित जाति/जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, सामान्य वर्ग के गरीब तथा अल्पसंख्यक समुदाय के 67 लाख छात्र-छात्राओं को लगभग 4,800 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप का लाभ प्राप्त हो रहा है। आज यह कार्य समय पर सम्पन्न हो पा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले छात्रवृत्ति की राशि कम थी। इसमें तकनीक का प्रयोग नहीं होता था। शासन से धनराशि जनपदों को प्रेषित की जाती थी। जनपदों में स्कॉलरशिप वितरण में अनियमितता के कारण 500 रुपये की स्कॉलरशिप धनराशि में से छात्रों को 200 से 250 रुपये ही मिल पाते थे। शेष धनराशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती थी। प्रधानमंत्री ने हमें तकनीक पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया, जिसका परिणाम है कि आज यहां एक क्लिक पर 28 लाख छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में 3,350 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप धनराशि पहुंच गयी है। यह इस बात का उदाहरण है कि तकनीक जीवन को किस प्रकार आसान बनाती है तथा भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था देती है। सरकार इस व्यवस्था से जोड़ने के लिए आज यहां उपस्थित है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले स्कॉलरशिप के साथ ही प्रत्येक क्षेत्र में भ्रष्टाचार था। कुपोषित बच्चों, नवजात शिशुओं तथा कुपोषित माताओं को दिये जाने वाले पोषाहार, विकास की योजनाओं तथा विभिन्न पारिवारिक लाभ योजनाओं में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार व्याप्त था। पहले की सरकार में दिव्यांगजन को 300 रुपये की पेंशन राशि दी जाती थी। यह भी समय पर नहीं मिलती थी। 06 माह में धनराशि मिलती थी, वह भी पूरी नहीं। निराश्रित महिला तथा वृद्धावस्था पेंशन के रूप में 500 रुपये दिये जाते थे। यह भी 06 माह में मिलते थे, जिसमें व्यापक भ्रष्टाचार होता था। आज उत्तर प्रदेश में 01 करोड़ 06 लाख निराश्रित महिलाओं, वृद्धजन तथा दिव्यांगजन को पेंशन के रूप में 12 हजार रुपये प्रतिवर्ष दिये जाते है। यह धनराशि सीधे उनके बैंक खातों में प्रेषित की जाती है। इसमें किसी प्रकार की कटौती नहीं होती है। भ्रष्टाचार करने वालों को यह मालूम है कि उनकी जगह जेल में है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन परिवारों के कमाऊ सदस्यों की आकस्मिक मृत्यु हुई है, उन्हें आज इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के अन्तर्गत 30,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। ऐसे 33,334 परिवारों की सहायता के लिए 100 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। वर्ष 2025-26 में 01 लाख 36 हजार से अधिक परिवारों को 412 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि प्रदान की गई है। वर्ष 2017 से अब तक 10 लाख से अधिक परिवारों को 3,039 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। पहले यह धनराशि इन परिवारों को नहीं मिल पाती थी। गरीबों और जरूरतमन्दों को मिलने वाला यह लाभ भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हमने प्रातःकालीन सत्र में बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की 18,000 से अधिक आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों एवं आंगनवाड़ी सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए हैं। विगत दिवस 665 नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए थे। इससे पूर्व, 1,228 नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए थे। मिशन रोजगार के अन्तर्गत बिना भेदभाव के हर नौजवान के लिए नौकरी और रोजगार की सम्भावनाओं को साकार किया जा रहा है। आज का यह कार्यक्रम उसी की एक कड़ी है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि गरीब परिवारों की बेटियों की शादी के लिए संचालित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना बाल विवाह से मुक्त विवाह को प्रोत्साहित करती है। इसके निमंत्रण पत्र जिलाधिकारी द्वारा वितरित किए जाते हैं। मंत्रिगण इन समारोहों में उपस्थित रहकर अपना आशीर्वाद देते हैं। जब इस योजना की शुरुआत की गई थी, तो इसका मजाक उड़ाया गया था, जबकि अब तक इस योजना के अन्तर्गत 05 लाख 54 हजार बेटियों का विवाह सम्पन्न हो चुका है। प्रदेश सरकार द्वारा इस योजना के तहत 01 लाख रुपये प्रति विवाह व्यय किए जाते हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के अनेक छात्र कोचिंग के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं। जब कोरोना काल में लॉकडाउन लगा, तो ऐसे बच्चों को सुरक्षित वापस लाने के लिए राजस्थान बसें भेजी गईं। तब हमने वर्ष 2020-21 में मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग की शुरुआत की थी। 01 लाख 15 हजार से अधिक अभ्यर्थियों को इस निःशुल्क कोचिंग का लाभ प्राप्त हो चुका है। अभी इसमें और कार्य किए जाने की आवश्यकता है। हर जनपद में वर्चुअल तथा फिजिकल, दोनों रूपों में इस प्रक्रिया को तेज करने की जरूरत है। इसके और भी अच्छे परिणाम आ सकते हैं। मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग को एक गाइड तथा योजक के रूप में विकसित करना है। इसके लिए समाज कल्याण विभाग को और मेहनत करने की आवश्यकता है, जिससे मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग यू0पी0एस0सी0, उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन, आई0आई0टी0-जे0ई0ई0, नीट, एन0डी0ए0, सी0डी0एस0 तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी तैयारी का एक प्लेटफॉर्म बन सके। यदि इस योजना के लिए और मेहनत की जाए, तो बड़ी संख्या में युवा इसका फिजिकल तथा वर्चुअल लाभ ले पाएंगे। यू0पी0एस0सी0, उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन, आई0आई0टी0-जे0ई0ई0, नीट से नवचयनित लोगों को प्रतिदिन अपने-अपने जनपदों में 01 घण्टे का समय मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग के लिए देना चाहिए। इससे नई पीढ़ी प्रशिक्षित होगी तथा आगे बढ़ेगी। ज्ञान की परम्परा ऐसे ही आगे बढ़ती है। अधिक से अधिक बच्चों का सेलेक्शन हो तथा एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा आगे बढ़े, इसके लिए मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग के अन्तर्गत और अच्छे कार्य करने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना के अन्तर्गत वर्ष 2026-27 के लिए 525 करोड़ रुपये का प्राविधान किया है। बेटी के जन्म से लेकर स्नातक की पढ़ाई के लिए सरकार द्वारा विगत 07 वर्षों में 26 लाख बालिकाओं को मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से लाभान्वित किया गया है। इसके अन्तर्गत 06 चरणों में 25 हजार रुपये की धनराशि बेटियों के खातों में उपलब्ध कराई जाती है। नये बजट में भी इस योजना के लिए 400 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। कामकाजी महिलाओं के लिए लखनऊ, गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद में 500 की क्षमता वाले छात्रावास के निर्माण के लिए धनराशि उपलब्ध करायी जा रही है। मेरठ, प्रयागराज, गोरखपुर, कानपुर, झाँसी और आगरा में 500 की क्षमता वाले श्रमजीवी महिला छात्रावासों के निर्माण हेतु धनराशि की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द युवा सशक्तिकरण योजना के अन्तर्गत 02 करोड़ युवाओं को टैबलेट वितरित किए जाने का लक्ष्य है। इसके अन्तर्गत 50 लाख युवाओं को अब तक टैबलेट दिए जा चुके हैं। शेष नौजवानों को टैबलेट वितरण के लिए बजट में 2,375 करोड़ रुपये का प्राविधान किया गया है। ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना’ के अन्तर्गत प्रोडक्ट को डिस्प्ले करने तथा महिला उद्यमिता सशक्तिकरण योजना के तहत महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए धनराशि की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना और प्रत्येक जनपद में युवाओं की स्किलिंग और एम्प्लॉयमेण्ट के लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल इम्प्लॉयमेण्ट एण्ड इण्डस्ट्रियल जोन की स्थापना हेतु धनराशि का प्राविधान किया गया है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि 8,000 न्याय पंचायतों में महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने तथा डिजिटल उद्यमी तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें न्याय पंचायत स्तर पर एक डिजिटल एण्टरप्रेन्योर का चयन किया जाएगा। सरकार उन्हें 10 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त और गारण्टी मुक्त लोन उपलब्ध कराएगी। यह न्याय पंचायत में नये रोजगार के सृजन में अपना योगदान करेंगे। इसमें 50 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं के लिए होगा, जो न्याय पंचायत में उद्यमिता को बढ़ावा देने का कार्य करेंगी।
मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के अन्तर्गत अब तक 01 लाख 40 हजार युवाओं को 05 लाख रुपये तक के ब्याज मुक्त व गारण्टी मुक्त ऋण की सुविधा उपलब्ध करायी गयी है। अर्थात विगत एक वर्ष में 01 लाख 40 हजार नये युवा उद्यमी प्रदेश में तैयार हुए हैं। सरकार का प्रयास है कि इस कार्यक्रम को और मजबूती के साथ आगे बढ़ाया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले सत्ता के संरक्षण में पलने वाले गुण्डे अपनी समानान्तर सरकारें चलाते थे। गरीब और वंचित की कोई सुनवाई नहीं होती थी। उनका अपमान किया जाता था। पहले वंचित समाज के संतों तथा सामाजिक न्याय से जुड़े महापुरुषों के प्रति सम्मान का भाव नहीं रखा गया। कन्नौज में बाबा साहब डॉ0 भीमराव आंबेडकर के नाम पर बने मेडिकल कॉलेज का नाम बदल दिया गया था। हमने उस मेडिकल कॉलेज का नाम फिर से बाबा साहब के नाम पर कर दिया। आज भी ऐसे लोग संवैधानिक संस्थाओं तथा बाबा साहब डॉ0 भीमराव आंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान का अपमान कर रहे हैं। यह बाबा साहब डॉ0 भीमराव आंबेडकर का भी अपमान है, जिसे भारत के गरीब, दलित तथा वंचित स्वीकार नहीं करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज को बाँटने वाले यह लोग सामाजिक वैमनस्यता पैदा करके तुष्टिकरण के नाम पर राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इनके गलत कार्यों से ही उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य बन गया था। यहाँ के नौजवानों के सामने पहचान का संकट खड़ा हो गया था। अब हमारा प्रदेश पहचान के संकट का मोहताज नहीं हैं। अब उत्तर प्रदेश दंगामुक्त, कर्फ्यूमुक्त, बीमारी से मुक्त हो चुका है। यह भारत की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनकर नयी पहचान के साथ विरासत और विकास का नया मॉडल प्रस्तुत कर रहा है। अब यहाँ पलायन नहीं, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार की सम्भावनाएँ बनी हैं। पंचायतीराज एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जहां एक ओर नए भारत का उदय हुआ है, वहीं उत्तर प्रदेश का सर्वांगीण विकास भी हो रहा है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास हमारी सरकार का मूल मंत्र है। उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य की श्रेणी से उबरकर रेवेन्यू सरप्लस स्टेट बना है। समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि मुख्यमंत्री की नजर में शिक्षा से बढ़कर कुछ भी नहीं है। भारत में छात्रवृत्ति वितरण में उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन सबसे अच्छे राज्यों में से एक है। आज छात्रवृत्ति वितरण का रिकॉर्ड बन रहा है। 4,750 करोड़ रुपये की धनराशि से बच्चों को आगे बढ़ने की एक ताकत दी जा रही है। हम ‘ई-गवर्नेंस से ईजी गवर्नेंस’ की ओर बढ़ रहे हैं। पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री नरेन्द्र कुमार कश्यप ने कहा कि आज का यह कार्यक्रम सामाजिक न्याय की भावना एवं उज्ज्वल भविष्य के संकल्प का दिव्य संगम है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने विकास, सुशासन, सुरक्षा एवं सांस्कृतिक गौरव के नए आयाम स्थापित किए हैं। मुख्यमंत्री ने अथक परिश्रम तथा स्पष्ट दृष्टिकोण से यह सिद्ध किया है कि राजनीति सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा का सर्वोच्च आधार है।
अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश सरकार नौजवानों के सपनों को ऊँचाइयों पर ले जाने का कार्य कर रही है। प्रदेश सरकार आगे बढ़कर क्षमतावान नौजवानों को प्रोत्साहित करने का कार्य कर रही है। आज पूरी दुनिया की नजर भारत पर और पूरे भारत की नजर उत्तर प्रदेश पर है। समाज कल्याण राज्य मंत्री श्री संजीव गोंड ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्ष 2017 बाद मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना से प्रदेश के सभी वर्ग के बच्चों को छात्रवृत्ति देने का कार्य किया जा रहा है। वनों में निवास करने वाले जनजातीय लोगों को वनाधिकार पट्टा एवं मुख्यमंत्री आवास योजना से आच्छादित किया गया है।

इस अवसर पर छात्रवृत्ति प्राप्त करने वालों छात्रों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें प्रतिवर्ष राज्य सरकार द्वारा छात्रवृत्ति प्राप्त हो रही है, जिससे उनकी पढ़ाई सुचारु रूप से जारी है। वह अपने संसाधनों की पूर्ति कर पा रहे हैं। यह छात्रवृत्ति उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हुई है।
इस अवसर पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष बैजनाथ रावत, यू0पी0 सिडको के अध्यक्ष वाई0पी0 सिंह, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, अपर मुख्य सचिव समाज कल्याण वेंकटेश्वर लू0, प्रमुख सचिव अल्पसंख्यक कल्याण संयुक्ता समद्दार, प्रमुख सचिव पिछड़ा वर्ग कल्याण राजेश कुमार सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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