अलग-अलग एजेंसियों की सर्वे रिपोर्ट की माने तो देश में लगभग तीन महीनों में 12 करोड़ से अधिक लोग कोरोना की वजह से अपनी नौकरी या रोजगार गवा चुके हैं, यानी इतनी बड़ी आबादी के पास इस वक़्त कोई काम नहीं है। भारत की अर्थव्यवस्था पहले से ही हिचकोले खा रही थी अब कोरोना की वजह से बाजार में मंदी जैसे हालात पैदा हो रहे हैं। आप समझ सकते हैं अगर देश में 12 करोड लोग बेरोजगार हो गए हैं, जिनके पास पैसे की कोई आमद नहीं रह गई तो इसका सीधा असर बाजार पर दिखेगा। पैसे के अभाव में ऐसे लोग अति आवश्यक चीजों के अलावा कोई भी वस्तु बाजार से नहीं खरीदेंगे। इनके खरीदारी नहीं करने का सीधा-सीधा असर बाजार में मौजूद अलग-अलग प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियों पर होगा। क्योंकि उनकी सप्लाई कम हो जाएगी जिस वजह से उनको मैन्युफैक्चरिंग भी कम करना होगा यानी एक तरह से बेरोजगारी और बढ़ सकती है।

सरकार ने 20 लाख करोड़ का पैकेज दिया जरूर है, लेकिन वह पैसा बाजार में कैसे सर्कुलेट हो और 12 करोड़ लोगों को दोबारा कैसे जल्दी से जल्दी रोजगार से जोड़ा जा सके यह तय समय सीमा में सुनिचित करना जरूरी है। ताकि भारत की इकोनामी को बचाया जा सके। कोरोना के डर और राज्य सरकारों की लचर व्यवस्थाओं की वजह से बहुत बड़े पैमाने पर प्रवासी अपने राज्यों को चले गए हैं। बिहार, झारखंड, बंगाल, उड़ीसा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी बड़ी संख्या में प्रवासी वापस लौटे हैं, इन राज्यों में पहले से ही रोजगार के सीमित अवसर हैं, लाखों की संख्या में पढ़े लिखे युवा बेरोजगार है, ऐसे में प्रवासियों को इन राज्यों में काम मिलेगा यह एक बड़ा सवाल है।

केंद्र और कई राज्य सरकारों ने लॉक डाउन के बाद अनलॉक की शुरुआत की है जिसके तहत अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए तमाम उद्योगों, व्यवसायिक केंद्र और प्रतिष्ठानों को खोलने का आदेश तो दे दिया है, लेकिन कई जगहों पर मजदूरों और वर्करों के अभाव में काम को गति नहीं मिल पाया है। आम लोगों के मन में कोरोना का डर घर कर गया है जिसको जल्दी निकालने की जरूरत है। अगर यह डर नहीं निकला तो मजदूर और वर्कर दोबारा महानगरों का रुख नहीं करेंगे जिसका सीधा असर काम धंधों पर पड़ेगा यानी जिस इक्नॉमी को गति देने की जुगत में सरकार ने अनलॉक किया है उसको पटरी पर लाना कठिन होगा।

