हरिद्वार – महामारी घोषित होने के बावजूद अभी हरिद्वार में ब्लैक फंगस बीमारी के इलाज की कोई व्यवस्था नही है। प्रदेश भर में ब्लैक फंगस के मरीजों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। प्रदेश के सभी जिलों में ब्लैक फंगस के उपचार की व्यवस्था ना होने से कुछ चुनिंदा अस्पतालों पर मरीजों का बोझ बढ़ गया है। घनी आबादी वाले हरिद्वार जिले में भी ब्लैक फंगस के संदिग्ध मरीज सामने आ रहे हैं। इलाज की व्यवस्था ना होने के कारण इन मरीजों को ब्लैक फंगस के इलाज के लिए चिन्हित अस्पतालों में रेफर करना पड़ रहा है।

जिलाधिकारी सी0 रविशंकर का कहना है कि मौजूदा कोविड अस्पतालों में उपचाररत मरीजों में ब्लैक फंगस ना फैले इसका ध्यान रखा जा रहा है और कोरोना पेशेंट को जागरूक भी किया जा रहा है। हालांकि ब्लैक फंगस के लक्षण दिखने पर फिलहाल रेफर करना मजबूरी है। मरीजों को रेफेर करने के बाद ऋषिकेश के एम्स अस्पताल में ही इसके इलाज की व्यवस्था की गई है। रेफेरल केस को वहाँ तुरंत भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया जाता है।

वहीं हरिद्वार कोविड प्रभारी मंत्री सतपाल महाराज से जब यह पूछा गया कि ब्लैक फंगस के इलाज़ के लिए हरिद्वार में कोई व्यवस्था नहीं, तो उन्होंने कहा मै कोविड प्रभारी मंत्री हूं, लेकिन यहां से कोई प्रस्ताव जाएगा तो मुख्यमंत्री इस पर विचार करेंगे, हालांकि सतपाल महाराज ने कहा कि सीएमओ से बात हुई 1 हज़ार इंजेक्शन की मांग की गई है जल्दी उपलब्ध होगा। ब्लैक फंगस को महामारी घोषित किया गया है, ऐसे में सरकार को भी इस ओर गंभीरता दिखानी होगी।

कोविड के बाद ब्लैक फंगस भी तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है, बड़ा सवाल ये है कि आखिर हरिद्वार जैसे जिले में जहां कोरोना के मामले भी काफी संख्या में आमने आये हैं, ऐसी स्थिति में ब्लैक फंगस के खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है, जरूरत है समय रहते व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की, ताकि ब्लैक फंगस जैसी महामारी से ग्रसित लोगों को समय पर जिले में इलाज़ मिल सके, जिससे उनकी ज़िंदगियां बचाई जा सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *