दिल्ली – किसान आंदोलन के 100 दिन पूरे हो गए हैं, केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों का किसान लगातार विरोध कर रहे हैं। किसानों ने तीनों बिल के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर पिछले 100 दिनों से धरने पर बैठे हैं, अपनी मांगे मनवाने के लिये किसानों ने भारत बंद, चक्का जाम और दिल्ली कूच, ट्रैक्टर रैली जैसे आंदोलन किये, जिससे सरकार पर दबाव बन सके। लेकिन सरकार अपने फैसले पर अडिग है और किसान मांगों पर।
किसानों ने भारत बंद का ऐलान किया तो कई राज्यों में कोई खास असर नहीं दिखा, मंडी, बाज़ार, आफिस और सड़कों पर आवाजाही भी रोजमर्रा की तरह चलती दिखी। हैं पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश समेत कुछ राज्यों में भारत बंद का असर जरूर दिखाई दिया। लेकिन ज्यादातर जगहों पर शोर-शराबा ज्यादा और बंद का असर कम दिखा। वहीं चक्का जाम को भी सीमित क्षेत्रों में ही समर्थन मिला। किसानों का 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली भी बड़े विवादों में रहा। लेकिन किसानों ने अपने आंदोलन को कम नहीं होने दिया और लगातर दिल्ली की सीमाओं पर अपनी मांगों को लेकर डटे हैं।
भारत सरकार ने तीनों कृषि बिल लाने के बाद यह दावा किया है कि इससे किसानों की हालत बेहतर होगी। लेकिन कई राज्यों के किसानों को एमएसपी, मंडी व्यवस्था और ज़मीन अधिग्रहण का डर सता रहा है। हालांकि कृषि मंत्री समेत सरकार के कई मंत्री किसानों को यह कह चुके हैं कि किसानों की चिंता बेबुनियाद हैं, इन बिलो से किसानों को ऐसा कोई नुकसान नहीं होने जा रहा है, किसानों को डरने की जरूरत नहीं है। खुद प्रधानमंत्री भी अलग-अलग मंचों से किसानों को कई बार संदेश दे चुके हैं लेकिन उसका भी असर किसानों पर नहीं दिखाई दिया। सरकार और किसान नेताओं के बीच कई राउंड की वार्ता भी हो चुकी है, लेकिन नतीजा अब भी वही है। सरकार अपने फैैसले पर कायम है और किसान अपने आन्दोलन पर।
सरकार की ओर से यह बार-बार कहा जा रहा है कि वार्ता का रास्ता अब भी खुला है। यह किसान नेताओं को तय करना है कि वह सरकार से वार्ता करना चाहते हैं या नहीं, और जो प्रस्ताव सरकार ने उनको दी है वह उससे सहमत हैं कि नहीं। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार ओर किसान इस पूरे मसले का समाधान निकाल पाएंगे, और क्या सरकार और किसान नेता आगे फिर वार्ता के लिये बैठेंगे। अगर बैठेंगे तो क्या कोई बीच का रास्ता निकल पायेगा। इस पर पूरे देश की नजरें टिकी है। फिलहाल नेता चुनाव में व्यस्त हैैं और किसान नेता, किसान पंचायतों में जुुटे हैैं।

