हरिद्वार – सुनील पांडे
पंचायती श्री निरंजनी अखाड़ा के प्रांगण में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राज राजेश्वराश्रम महाराज की अध्यक्षता में जापान के बाला कुंभ गुरु मुनि जी का महामंडलेश्वर पट्टाभिषेक वैदिक रीति से सम्पन्न हुआ। यह अनुष्ठान न केवल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा, बल्कि विश्व पटल पर सनातन धर्म की बढ़ती चेतना का जीवंत संदेश भी बनकर उभरा।

संत समाज की उपस्थिति में वैदिक संन्यास संस्कार संपन्न हुआ। समारोह का संचालन अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष, मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट हरिद्वार के अध्यक्ष एवं पंचायती श्री निरंजनी अखाड़ा के सचिव महंत रविंद्र पुरी महाराज ने संत परंपरा और गरिमा और दिव्यता के साथ किया। संन्यास परंपरा के अनुसार सबसे पहले बालाकुंभ गुरु मुनि के कानों से कुंडल उतारे गए। इसके बाद उन्हें वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संन्यास दीक्षा प्रदान की गई।

जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राज राजेश्वराश्रम महाराज ने उनके कान में गुरु मंत्र फूँका, और उन्हें संन्यास परंपरा से जोड़ते हुए दिव्य दीक्षा प्रदान की।

संतों ने दिया मार्गदर्शन, सनातन धर्म की मजबूती पर जोर, कार्यक्रम में उपस्थित सभी महामंडलेश्वर, महंतों व संतों ने अपने विचार व्यक्त किए। सबसे पहले महामंडलेश्वर ललितानंद गिरी ने आध्यात्मिक उद्बोधन देते हुए सनातन परंपरा की महत्ता पर प्रकाश डाला। पंचायती श्री निरंजनी अखाड़ा के सचिव महंत राम रतन गिरी महाराज ने सभी का आभार व्यक्त किया।

जापान से आए बाला कुंभ गुरु मुनि का महामंडलेश्वर बनना न केवल अखाड़ों के लिए गौरव का विषय है, बल्कि इस बात का प्रतीक भी है कि सनातन धर्म विश्व को आकर्षित कर रहा है और इसका प्रभाव सीमाओं से परे बढ़ रहा है। सनातन की ध्वजा अब विश्व में फहराएगी
हरिद्वार की पवित्र भूमि पर सम्पन्न हुआ यह समारोह इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। यह न केवल सनातन धर्म की आभा का विस्तार है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरक संदेश भी है कि सनातन धर्म को बचाने, समझने और प्रसारित करने का समय अब आ चुका है।

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