हरिद्वार, 26 सितंबर – पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना का पितृ पक्ष आज से शुरू हो गया। धर्मनगरी हरिद्वार में पितृ कर्म के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दिखने लगी है।

हरिद्वार के मायापुर स्थित नारायणी शिला मंदिर में देश के अलग अलग हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालु अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। मंदिर में नारायण बलि पूजा सहित अन्य पितृ कर्म भी कराए जाते हैं। पितृ पक्ष के दौरान नारायणी शिला पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। हरिद्वार की नारायणी शिला को पितृ कर्म के लिए विशेष महत्व वाला तीर्थ माना जाता है।

नारायणी शिला मंदिर की पौराणिक कथा गयासुर राक्षस और भगवान विष्णु से जुड़ी है। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित मनोज कुमार त्रिपाठी के अनुसार, वायु पुराण के वर्णन है कि नारद जी की प्रेरणा से गयासुर नाम का राक्षस भगवान विष्णु से बैर करने के लिए बद्रिकाश्रम गया था लेकिन भगवान विष्णु ने उसे दर्शन नहीं दिए। इसलिए गयासुर राक्षस ने वहां से भगवान विष्णु के श्रीविग्रह का हरण कर लेकर भागा था। लेकिन भगवान विष्णु ने उसके केश पकड़कर पटक दिया। इसी दौरान श्रीविग्रह के अलग अलग हिस्से तीन प्रमुख स्थानों पर गिरे। भगवान विष्णु का मस्तक बद्रीनाथ के ब्रह्मकपाल में, हृदय और कंठ से नाभि तक का हिस्सा हरिद्वार की नारायणी शिला में और चरण बिहार के गया में गिरे थे। कहा जाता है कि गयासुर के भगवान विष्णु के चरणों में पहुंचने के बाद उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई। भगवान विष्णु ने आशीर्वाद दिया था कि इन तीन स्थान पर वास करेंगे।

मान्यता है कि जो भी अपने पितरों की पूजा अर्चना यहां करेगा उनके पितरों को मोक्ष प्रदान करेंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु के हृदय में माता लक्ष्मी का निवास है, इसलिए यहां किए जाने वाले श्राद्ध और पितृ कर्म का विशेष महत्व बताया गया है।

बाइट – पंडित मनोज कुमार त्रिपाठी, मुख्य पुजारी

बाइट – हेमचन्द्र शर्मा, श्रद्धालु

बाइट – इंदु श्रीवास्तव, श्रद्धालु

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *