हरिद्वार, 21 अक्टूबर – गंगनहर की वार्षिक बंदी के बाद गंगा की धारा सूखने से घाटों पर जमा कूड़ा कचरा दिखाई देने लगा है। गंगा की सतह और रेलिंग पर जगह जगह कपड़े, प्लास्टिक और पॉलीथीन नजर आ रही हैं। इससे न सिर्फ गंगाजल प्रदूषित हो रहा है बल्कि जलीय जीवों के लिए भी हानिकारक हैं। हालांकि प्रशासन और समाजसेवी संस्थाएं गंगा की साफ सफाई में जुट गई हैं।
दरअसल हर वर्ष दशहरे से लेकर दीपावली तक गंगनहर का पानी रोक दिया जाता है। इस दौरान गंगा की साफ सफाई और मेंटिनेंस का कार्य किया जाता है। करोड़ों लोगों की आस्था मां गंगा से जुड़ी है। मां गंगा को मोक्षदायिनी और जीवनदायिनी माना जाता है। लेकिन गंगा बंदी के पहले ही दिन हरिद्वार में इस तरह की तस्वीरें चिंता बढ़ाने वाली हैं।
इस बीच ज्योतिषाचार्यों ने भी श्रद्धालुओं से गंगा में कपड़े, पॉलीथीन और अन्य गंदगी न डालने की अपील की है।
वहीं मुख्य विकास अधिकारी ललित नारायण मिश्र ने कहा कि गंगा बंदी के बाद स्वच्छता अभियान शुरू कर दिया गया है। इसमें कई सामाजिक संस्थाओं ने भागीदारी करने की सहमति जताई है। गंगा की स्वच्छता को जरूरी बताते हुए कहा कि नदी को साफ रखना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। सभी नागरिकों को इसमें भागीदारी निभानी चाहिए। श्रद्धालुओं को गंगा में पुराने कपड़े डालने से बचना चाहिए। निर्धारित स्थानों पर ही पुराने कपड़े छोड़े। गंगा घाटों पर स्वच्छता बनाए रखने के लिए लोगों को जागरूक होना होगा।
Byte – ललित नारायण मिश्र, सीडीओ हरिद्वार।
Byte – नितिन गौतम, अध्यक्ष, गंगा सभा।
Byte – पंडित मनोज त्रिपाठी, मुख्य पुजारी, नारायणी शिला मंदिर।
