हरिद्वार – धर्मनगरी हरिद्वार में कुंभ पर्व चल रहा है और आज कुम्भ का तीसरा शाही स्नान है। बैशाखी पर्व कुम्भ नगरी हरिद्वार में पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। हर की पौड़ी समेत अन्य गंगा घाटों पर सुबह लगभग 5 बजे से ही श्रद्धालुओं की भीड़ है हालाँकि कोरोना के चलते वो पहले वाली रौनक तो नही है। लेकिन कुम्भ पर्व के शाही स्नान के कारण हर की पैड़ी आम श्रद्धालु के स्नान के लिए सुबह 8 बजे तक ही खुली है। जिसके बाद अखाड़े शाही स्नान को आएंगे और अपने क्रम के अनुसार शाही स्नान करेंगे।
देश भर से आये श्रद्धालुगण कुम्भ पर्व पर माँ गंगा में स्नान करके माँ गंगा से आराधना कर रहे है कि उनका जीवन शांतिपूर्वक बीते और मोक्ष की प्राप्ति हो। दरअसल बैशाखी के अवसर पर गेहू की फसल तैयार हो जाती है और इस दिन से फसल कटनी शुरू हो जाती है। बैशाखी पर गंगा स्नान का विशेष महत्व है। स्नान का महत्व होने से हरिद्वार में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते है और माँ गंगा का स्नान कर दान,भंडारा आदि करते है। आज का बैशाखी स्नान कुंभ पर्व पर पड़ रहा है।
पंडित मनोज शास्त्री कहते है कि आज कुंभ स्नान का विशेष योग है। आज हरकी पैड़ी या गंगा के किसी अन्य गंगा घाट पर किया गया स्नान कई सौ गुना फल देने वाला है। बैसाखी का पर्व यानि गंगा स्नान कर पुण्य कमाने का मौका, ओर उस पर कुम्भ पर्व। पंडित मनोज त्रिपाठी बताते है कि वैसे तो सभी स्नानो पर गंगा स्नान का महत्व है। आज के दिन है मात्र स्नान करना ही व्यक्ति को हजार अश्व मेघ यज्ञ के समान फल देता है और आज के दिन अपने पितरों के प्रति तर्पण श्राद्ध आदि करना, पीपल के वृक्ष की पूजा करना उसमें अपने पितरों की कामना करते हुए किसी भी प्रकार से 108 परिक्रमा कर ले तो यह निश्चित समझिए कि व्यक्ति की कितनी भी कठिनाईपूर्ण जीवन हो वह सुधर जाता है। व्यक्ति की मनोकामना इच्छित कामना पूर्ण हो जाती है, गंगा आदि पवित्र नदियों में हरिद्वार आदि तीर्थो में आज के दिन स्नान का अत्यधिक महत्व है। आज ब्रह्मकुंड हर की पैड़ी स्नान करके व्यक्ति अपने जीवन को कल्पकल्पान्तर तक के पाप नष्ट हो जाते ही। व्यक्ति मोक्ष को प्राप्त कर लेता है।
देश में एक बार फिर तेजी से फैलते कोविड संक्रमण के बीच बैशाखी स्नान पर पूरे देश से श्रद्धालु हरिद्वार आये है और सभी माँ गंगा में स्नान कर गंगा माँ से देश से कोरोना महामारी को दूर करने, देशवासियों कि कुशलता की कामना कर रहे है वही अपने पितरों को खुश करने के लिए उनके निमित पूजा आराधना भी करवा रहे है।

