हरिद्वार, 21 अक्टूबर – धर्मनगरी हरिद्वार में दशहरे की रात से शुरू हुई वार्षिक गंगा बंदी का असर हरकी पैड़ी पर भी दिखाई देने लगा है। विश्व प्रसिद्ध हरकी पैड़ी पर गंगाजल उपलब्ध नहीं होने से गंगा स्नान और अस्थि विसर्जन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं को मायूस होना पड़ा। दूर दराज से लंबा सफर तय कर हरिद्वार पहुंचे कई श्रद्धालु अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गंगा में स्नान और पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जन करने की उम्मीद लेकर आए थे, लेकिन पानी नहीं मिलने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। श्रद्धालुओं ने गंगा बंदी के दौरान भी हरकी पैड़ी पर स्नान और अस्थि विसर्जन के लिए पानी उपलब्ध कराने की बात कही है।
हरकी पैड़ी हरिद्वार के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान करने पहुंचते हैं। इसके अलावा देश के विभिन्न हिस्सों से लोग अपने पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जन करने के लिए भी हरिद्वार आते हैं। ऐसे में गंगा बंदी के दौरान हरकी पैड़ी पर पानी की उपलब्धता नहीं होने से श्रद्धालुओं को निराशा झेलनी पड़ी। वार्षिक गंगा बंदी के चलते हरकी पैड़ी का नजारा भी बदला हुआ नजर आया।
हरकी पौड़ी पहुंचे श्रद्धालु ने अपनी परेशानी बताई। उन्होंने कहा कि वह अपने पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जन करने के लिए हरिद्वार आए थे, लेकिन हरकी पैड़ी पर पानी नहीं मिलने से उन्हें परेशानी हुई। उन्होंने कहा कि गंगा बंदी के दौरान भी श्रद्धालुओं की धार्मिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्नान और अस्थि विसर्जन के लिए पानी छोड़ा जाना चाहिए
वहीं मुख्य विकास अधिकारी ललित नारायण मिश्र ने कहा कि हर वर्ष की तरह हरकी पैड़ी पर पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।
गौरतलब है कि हरिद्वार में हर वर्ष दशहरे की रात से गंगा बंदी शुरू होती है। इस दौरान गंगनहर की सफाई और आवश्यक मरम्मत कार्य किए जाते हैं। दीपावली के पूर्व गंगनहर में पानी की आपूर्ति दोबारा सुचारु की जाती है।
