सचिन कुमार

हरिद्वार – सोशल मीडिया पर रील बनाने के चक्कर में युवा पीढ़ी अपनी ही जान से खिलवाड़ कर रही है। हरिद्वार में हाल ही में दो छात्रों की गंगा में डूब कर मौत हो गई। जब ये दोनों युवक पानी में डूबे उस वक्त उनके दोस्त वीडियो बना रहे थे। सोशल मीडिया के लिए बन रहा ये वीडियो दोनों के लिए आखिरी वीडियो साबित हुआ और ये हादसे रील बनाने वाले अन्य लोगों के लिए एक बड़ा सबक साबित हुए हैं।

दरअसल सोशल मीडिया पर लाइक और कमेंट पाने के लिए युवा इन दिनों अपनी जान से खेलने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं। गंगा में नहाते हुए रील बनाने और लापरवाही करने पर दो छात्रों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ गया। 12 फरवरी को आईआईटी रुड़की के छात्र की गंगा में तैरने के दौरान और 18 फरवरी को एनडीए की कोचिंग कर रहे हैं आयुष पटवाल की पुल से छलांग लगाने के बाद डूबकर मौत हो गई।

गंगा घाटों पर सिर्फ युवा ही स्टंट नहीं कर रहे बल्कि पिछले साल जुलाई महीने में हरियाणा से आई 75 साल की एक तैराक दादी का वीडियो भी तेजी से वायरल हुआ था। जिसमें वृद्ध महिला ने ऊंचे पुल से पानी में छलांग लगाई और तैरते हुए दूर निकल गई। वहीं पुलिस अधिकारी लोगों से लापरवाही ना करने और चैन पकड़कर नहाने की अपील कर रहे हैं।

मनोरंजन और इंफॉर्मेशन के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना बेशक गलत नहीं है। लेकिन जान जोखिम में डालकर सोशल मीडिया पर लोकप्रियता बटोरना किसी भी हाल में सही नहीं ठहराया जा सकता। हरिद्वार में हुए दो हादसे युवाओं के लिए सबक हैं। आज के दौर में ऐसे हादसों से युवा पीढ़ी को संभलने की जरूरत है।

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