लखनऊ, 3 फरवरी – उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज यहां लोक भवन में आहूत एक उच्चस्तरीय बैठक में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के कार्यां की समीक्षा की। उन्होंने प्रदेश में सम्भावित बाढ़ और अतिवृष्टि की चुनौतियों के दृष्टिगत व्यापक तैयारी और प्रभावी समन्वय पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जितनी बेहतर तैयारी होगी, उतनी ही तेजी और सफलता से चुनौती का समाधान किया जा सकेगा। उन्होंने बाढ़/अतिवृष्टि पूर्व प्रबन्धन की विस्तृत समीक्षा करते हुए सभी तटबन्धों, ड्रेनों और संवेदनशील स्थानों की समयबद्ध मरम्मत, सुदृढ़ीकरण और निगरानी को अनिवार्य बताया। उन्होंने निर्देश दिये कि सतर्कता, समन्वय और तय समयसीमा में काम पूरा करना ही सुरक्षित बाढ़ प्रबन्धन की मूल कुंजी है।

मुख्यमंत्री को प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन ने अवगत कराया कि उत्तर प्रदेश में गंगा, सरयू (घाघरा) राप्ती, रामगंगा, गंडक, यमुना, गोमती और सोन नदी बेसिन के आस-पास के जनपद बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आते हैं। नदी-पट्टी और वर्षा पैटर्न का विश्लेषण करते हुए इस वर्ष 12 जनपदों में 18 तटबंधों को संवेदनशील चिन्हित किया गया है, जिनकी कुल लम्बाई 241.58 कि0मी0 है। 11 जनपदों के 19 तटबंधों को अति संवेदनशील चिन्हित किया गया है, जिनकी कुल लम्बाई 464.92 कि0मी0 है। इन सभी स्थानों पर अग्रिम सुरक्षा कार्य प्राथमिकता पर संचालित हो रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में जल-निकासी को सुचारु रखने के लिए बड़े पैमाने पर ड्रेनों की सफाई और ड्रेजिंग कराई जा रही है। विभाग के अधीन कुल 10,727 ड्रेन हैं, जिनकी संयुक्त लम्बाई 60,047 कि0मी0 है। कई महत्वपूर्ण रूटों की सफाई पूरी हो चुकी है और शेष कार्य तय समय में पूरे किए जा रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अनुमोदित ड्रेजिंग परियोजनाएं जनपदवार लागू की जा रही हैं, जिससे नदी प्रवाह सुधरेगा और तटीय इलाकों में जलभराव कम होगा। इसके साथ ही, वर्ष 2026 की सम्भावित बाढ़ स्थिति को ध्यान में रखते हुए नई सुरक्षा परियोजनाएं भी प्रस्तावित की गई हैं, जिनके परीक्षण और अनुमोदन की प्रक्रिया जारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी तटबंधों और बैराजों पर रियल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। उन्होंने ड्रोन-मैपिंग, वॉटर लेवल सेंसर और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय को और मजबूत बनाने के निर्देश दिये। जहां कहीं भी नदी की मेन स्ट्रीम में सिल्ट की अधिकता हो, नदी उथली हो, वहां ड्रेजिंग को प्राथमिकता दी जाए और नदी को चैनलाइज किया जाए। यदि ड्रेजिंग से समाधान होना सम्भव न हो, तभी तटबंध अथवा कटान निरोधी अन्य उपायों को अपनाया जाए।

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