हरिद्वार, 3 नवंबर – भारतीय संस्कृति और परंपरा में मिट्टी के दीये एवं मूर्तियों का विशेष महत्व रहा है। बदलते समय के साथ आधुनिकता की दौड़ में मिट्टी से जुड़ी यह पारंपरिक कला धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर पहुंच रही है। ऐसे में इस प्राचीन कला को नया स्वरूप देने और स्थानीय कारीगरों को रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से माटीकला बोर्ड रुड़की द्वारा महत्वपूर्ण पहल की जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ विजन को धरातल पर उतारने तथा स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों के क्रम में जनपद में माटीकला को बढ़ावा दिया जा रहा है।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित एवं मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र की पहल पर ग्राम्य विकास विभाग के माध्यम से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) एवं आरआईपी परियोजना के सहयोग से माटीकला की इस पहल को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके तहत रुड़की में लिथोप्रेस के समीप महिलाओं एवं पुरुषों को मिट्टी के दीये और आकर्षक मूर्तियां बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि पारंपरिक कला को संरक्षित करने के साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकें।
