स्वरूप पूरी/सुनील पाल
हरिद्वार – राज्य में मानव वन्यजीव संघर्ष एक ज्वलन्त समस्या बन चुका है। राज्य के पहाड़ी जिलों के साथ ही मैदानी क्षेत्रों में आये दिन मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं प्रकाश में आती रहती है। इन घटनाओं को रोकने व आबादिय क्षेत्रों में वन महकमे के साथ अन्य विभागो की भूमिका को लेकर राजाजी टाइगर रिजर्व की चीला रेंज में कार्यशाला के माध्यम से गहन मंथन किया गया।
इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में वन महकमे के साथ राजस्व, उत्तराखंड पुलिस व एसडीआरएफ के जवानों ने आपात स्थिति के दौरान उनकी भूमिका पर चर्चा की। इस कार्यशाला में वन महकमे के साथ अन्य विभागों के अधिकारियों ने अपने विचार व अनुभव साझा कर इस ज्वलन्त मुद्दे के निराकरण के समाधान पर चर्चा की। इस दौरान वन महकमे के प्रभारी चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन रंजन मिश्रा, राजाजी के निदेशक साकेत बडोला, उपनिदेशक कहकशा नसीम, मीरा कैंतुरा , वन्यजीव प्रतिपालक प्रशांत हिन्दवान, रविन्द्र पुंडीर व चीला वनक्षेत्राधिकारी शैलेश घिल्डियाल ने भी अपने विचार साझा किए।
“मानव वन्य जीव संघर्ष रोकने को लेकर राज्य सरकार ने अहम निर्देश दिए है, वर्तमान में गुलादरो, बाघ, भालू, हाथियों व मधुमखियों के कारण कभी कभी आपात स्थिति उतपन्न ही जाती है, ऐसी आपात स्थिति के दौरान वन महकमे के साथ अन्य विभागों के तालमेल को लेकर यह महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की है, उम्मीद है कि भविष्य में इसके बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे।”
रंजन मिश्रा, प्रभारी चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन।
“मानव वन्यजीव संघर्ष के दौरान अन्य विभागों की स्थिति भी बहुत महत्वपूर्ण होती है, आपात स्थिति में अन्य विभागों के साथ आपसी समन्वय को लेकर मंथन किया गया है, भविष्य में यह समन्वय कारगर साबित होगा।”
साकेत बडोला, निदेशक राजाजी टाइगर रिजर्व।

