लखनऊ, 9 फरवरी – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में ईको-टूरिज्म को रोजगार सृजन, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास का प्रमुख आधार बताते हुए इसके लिए एक समग्र एवं समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि प्रदेश की समृद्ध जैवविविधता, वन क्षेत्रों और प्राकृतिक विरासत में ईको-टूरिज्म की अपार सम्भावनाएं निहित हैं, जिन्हें योजनाबद्ध ढंग से धरातल पर उतारने की आवश्यकता है। इसके लिए निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि ईको-टूरिज्म को एक सशक्त और टिकाऊ उद्योग के रूप में विकसित किया जा सके। मुख्यमंत्री आज यहां लोक भवन में उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म विकास बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में उन्होंने निर्देश दिए कि चयनित ईको-टूरिज्म स्थलों पर पर्यटकों के लिए अच्छे होटल और स्तरीय रेस्टोरेण्ट, गुणवत्तापूर्ण आवासीय सुविधाएं और आधुनिक बुनियादी ढांचा विकसित किया जाए, जिससे राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके। उन्होंने कहा कि गोरखपुर का कुसम्ही जंगल, अयोध्या का कुमारगंज क्षेत्र, गाजीपुर का कामाख्या वन पार्क तथा लखीमपुर खीरी की महेशपुर रेंज जैसे सम्भावनाशील क्षेत्रों को पी0पी0पी0 मॉडल के माध्यम से विकसित किया जाए और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जैवविविधता, प्राकृतिक सम्पदा, वेटलैण्ड, झीलें, वन्यजीव और नदी तंत्र केवल पर्यटन का विषय नहीं, बल्कि प्रदेश के भविष्य का आधार हैं। ईको-टूरिज्म आने वाले वर्षों में रोजगार, अर्थव्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक पहचान का बड़ा स्तम्भ बनेगा, इसलिए प्रत्येक जिले में सुरक्षित, स्वच्छ और सस्टेनेबल ईको-टूरिज़्म मॉडल विकसित किया जाए। मुख्यमंत्री जी ने निर्देश दिए कि ईको-टूरिज्म को प्रकृति संरक्षण, स्थानीय रोजगार, निजी निवेश और ग्रामीण विकास का मजबूत मॉडल बनाया जाए तथा इसके संचालन में स्थानीय समुदाय की भागीदारी को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कनेक्टिविटी सुधार पर बल देते हुए कहा कि लखनऊ-पलिया और नई दिल्ली-पलिया के बीच सप्ताहान्त ए0सी0 बस सेवा का संचालन किया जाना चाहिए। उन्होंने पीलीभीत-मैलानी-बहराइच के लिए क्षेत्रीय बस सेवा प्रारम्भ करने के निर्देश देते हुए कहा कि परिवहन निगम के सफल मॉडल को देखते हुए इन सेवाओं का विस्तार अन्य ईको-टूरिज़्म स्थलों तक किया जाए।

बैठक में मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच दुधवा, पीलीभीत, रानीपुर और कतर्नियाघाट टाइगर रिज़र्व सहित हैदरपुर, बखिरा, सूर सरोवर, समसपुर और नवाबगंज जैसे प्रमुख वेटलैण्ड्स में कुल 44 ईको-टूरिज़्म इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। बोर्ड अब परिसम्पत्तियों के मॉनेटाइजेशन और दीर्घकालिक सस्टेनेबिलिटी पर काम कर रहा है, जिसके तहत ईको लॉज, फ्लोटिंग रेस्टोरेन्ट और पर्यटक सुविधाओं के लिए पी0पी0पी0 मॉडल लागू किया जा रहा है। बैठक में मुख्यमंत्री को यह भी अवगत कराया गया कि वर्ष 2025-26 में विभिन्न जनपदों जैसे अयोध्या, आगरा, गोरखपुर, लखनऊ, चित्रकूट, महराजगंज, प्रयागराज, बांदा, बहराइच, सीतापुर, उन्नाव, बलिया, इटावा, मैनपुरी आदि में नए पार्क, इण्टरप्रिटेशन सेन्टर, वेटलैण्ड विकास, बर्ड वॉचिंग टावर, ट्रेल्स, कैम्पिंग और पर्यटक सुविधाओं पर आधारित कुल 31 नई परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं। बोर्ड द्वारा एक ए0आई0 चैटबॉट और मोबाइल ऐप भी विकसित किया जा रहा है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने पर्यटन विकास की विभागीय गतिविधियों से मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया।

इस अवसर पर वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, और वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अरुण कुमार सक्सेना की गरिमामयी सहभागिता रही।

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