लखनऊ, 9 फरवरी – उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वन्यजीव संवेदनशील क्षेत्रों में प्रस्तावित सभी विकास एवं निर्माण कार्य वैज्ञानिक मानकों, न्यूनतम पर्यावरणीय प्रभाव और विधिक प्रक्रियाओं के पूर्ण अनुपालन के साथ ही किए जाएं। विकास की प्रत्येक प्रक्रिया में वन्यजीवों की सुरक्षा, उनके प्राकृतिक आवागमन तथा आवासीय निरन्तरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मुख्यमंत्री आज यहां लोक भवन में ‘राज्य वन्यजीव परिषद की 20वीं बैठक’ की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री जी को ‘लार्जेस्ट ऑनलाइन फोटो एल्बम पीपुल प्लाण्टिंग प्लाण्ट्स’ तथा 09 जुलाई, 2025 को प्रदेश में हुए व्यापक वृक्षारोपण के गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के प्रमाण पत्र सौंपे गए। मुख्यमंत्री जी को एटा जनपद स्थित पटना पक्षी विहार को ‘वेटलैण्ड ऑफ इण्टरनेशनल इम्पॉर्टेन्स’ घोषित किए जाने सम्बन्धी प्रमाण पत्र भी सौंपा गया।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि वन्यजीव क्षेत्रों से जुड़े सभी विकास प्रस्ताव संवेदनशीलता और दूरदर्शिता के साथ तैयार किए जाएं। प्रस्ताव भेजते समय सम्बन्धित विभाग पर्यावरणीय जोखिम, जैव-विविधता पर सम्भावित प्रभाव, वन्यजीव मूवमेण्ट, वैकल्पिक मार्गों और आधुनिक तकनीकी समाधानों का विस्तृत एवं वैज्ञानिक विश्लेषण अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करें, ताकि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलित एवं टिकाऊ दृष्टिकोण सुनिश्चित किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने वृक्ष कटाई से सम्बन्धित प्रस्तावों पर विशेषज्ञों की राय लेते हुए निर्देश दिए कि किसी भी परियोजना में अनावश्यक वृक्ष कटान की अनुमति न दी जाए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वृक्षों की कटाई केवल अपरिहार्य परिस्थितियों में ही की जाए और विकास की आड़ में पर्यावरण को क्षति न पहुँचे। जहां विकल्प उपलब्ध हों, वहां ट्रेंचलेस टेक्नोलॉजी, एलिवेटेड स्ट्रक्चर तथा ईको-फ्रैण्डली तकनीकों को प्राथमिकता दी जाए। विकास परियोजनाओं की गति और वन्यजीव संरक्षण, दोनों राज्य सरकार की प्राथमिकताएं हैं और उत्तर प्रदेश सरकार संतुलित, वैज्ञानिक तथा दूरदर्शी नीति के साथ इन दोनों उद्देश्यों को साथ लेकर आगे बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वेटलैण्ड्स प्राकृतिक धरोहर हैं और प्रत्येक दशा में उनका संरक्षण किया जाना चाहिए। कुछ वेटलैण्ड्स में सिल्ट जमा होने की जानकारी उनके संज्ञान में आई है, जिसका तत्काल निराकरण कराया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि यह कार्य ‘विकसित भारत-जी राम जी’ अभियान के अन्तर्गत कराया जा सकता है।
बैठक में विभिन्न वन्य जीव क्षेत्रों में विकास की विभिन्न परियोजनाओं पर निर्णय भी हुआ। परिषद के समक्ष कुल 12 नए प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए, जिनमें सड़क चौड़ीकरण, पेट्रोल पम्प एवं फ्यूल स्टेशन स्थापना, ट्यूबवेल प्रेशर प्रणाली, भूमिगत पाइपलाइन, मोबाइल टावर, ऑप्टिकल फाइबर केबल तथा सम्पर्क मार्ग निर्माण जैसी विभिन्न परियोजनाएं शामिल हैं। यह प्रस्ताव इटावा, गोण्डा, पीलीभीत, बरेली, बांदा सहित विभिन्न जनपदों के वन्यजीव संवेदनशील क्षेत्रों तथा ईको-सेंसिटिव जोन से सम्बन्धित हैं। बैठक में परियोजनाओं पर सहमति प्रदान की गई।

