देहरादून – मंत्री सौरभ बहुगुणा की अध्यक्षता में उत्तराखण्ड राज्य मत्स्य पालक विकास अभिकरण की प्रबन्ध समिति की 22 वीं बैठक देहरादून में सम्पन्न की गयी। बैठक मे विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई, जिसमें निर्माणाधीन राज्य स्तरीय इण्टीग्रेटेड एक्वापार्क में निर्यात उन्मुख प्रोसेसिंग यूनिट, तिलैपिया एवं पंगेशियस हैचरी के बेहतर संचालन एवं कार्यों हेतु भारत सरकार की प्रतिशिष्ट संस्थाओ के साथ परामर्शी सेवाये किये जाने का निर्णय लिया गया।

बैठक में राज्य के ट्राउट मत्स्य पालको को समय पर मत्स्य बीज उपलब्ध कराये जाने के लिए डेनमार्क से 25 लाख ट्राउट ओवा का आयात किये जाने पर सहमति दी गयी। राज्य की विभिन्न झीलो में संरक्षण व संवर्द्धन तथा एक्वाटूरिज्म को बढाये जाने हेतु केज कल्चर कार्यों पर सहमति बनी जिसके लिए सम्बन्धित विभाग/संस्था से सहमति प्राप्त की जायेगी।

जनपद हरिद्वार एवं उधमसिंह नगर को Ornamental fisheries Hub के रूप में विकसित किये जाने का भी निर्णय लिया गया।
मंत्री सौरभ बहुगुणा ने सदन में सरकार द्वारा पिछले 4 वर्षों में विभाग हेतु औसतन प्रतिवर्ष 22 प्रतिशत बजट वृद्धि, नवीन स्वीकृत ट्राउट प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना आदि हेतु मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह को धन्यवाद सहित मात्स्यिकी सेक्टर राज्य में तेज गति से बढ़ने वाला तीसरा सेक्टर होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। मंत्री सौरभ बहुगुणा द्वारा किसानो की आय बढाने हेतु सकारात्मक कार्यों को धरातल पर उतारे जाने के निर्देश दिये गये। मत्स्य पालको द्वारा उत्पादित मछलियो के विपणन हेतु मंत्री द्वारा निर्यात के रोडमैप का अनुमोदन करते हुए आवश्यक प्रमाणीकरण पर कार्यवाही करने एवं प्रथम फेज में 100 टन ट्राउट मछली के निर्यात पर कार्य किये जाने के निर्देश दिये गये। साथ ही केन्द्रीय शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, भीमताल एवं मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय, पंतनगर के सहयोग लिये जाने के भी निर्देश दिये गये।
बैठक में अभिकरण के उपाध्यक्ष उत्तम दत्ता, डॉ० बी०वी०आर०सी० पुरुषोत्तम, सचिव मत्स्य, उत्तराखण्ड शासन, चन्द्र सिंह धर्मशक्त् निदेशक मत्स्य/सचिव, अभिकरण, खजान चन्द्र पाण्डेय, अपर सचिव वित्त विभाग, उत्तराखण्ड शासन, श्री अनिल कुमार, उप निदेशक, मत्स्य विभाग, मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय पंतनगर के विभागाध्यक्ष अवधेश कुमार, शरद श्रीवास्तव, मुख्य अभियंता, सिंचाई विभाग, प्रोफेसर एच०सी० बिष्ट, कुमायूँ विश्वविद्यालय नैनीताल, केन्द्रीय शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान के प्रतिनिधि एवं अन्य विभिन्न विभागो के उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।

