सचिन कुमार/हरिद्वार
हरिद्वार = सनातन धर्म में श्राद्ध पक्ष का विशेष महत्त्व है। सोलह दिन चलने वाला श्राद्ध पक्ष आज से आरम्भ हो गया है। मान्यता है कि भारतवर्ष में बद्रिकाश्रम, गया तथा हरिद्वार स्थित नारायणी शिला मंदिर, इन तीन स्थानों पर अपने पितरो का श्राद्ध करने से पितरो को मोक्ष की प्राप्ति होती है। कहते हैं हरिद्वार स्थित नारायणी शिला मंदिर के दर्शन मात्र से ही मनुष्यो के पाप नष्ट हो जाते है और यही कारण है कि आज सुबह से यहाँ श्रद्धालुओं का ताँता लगा हुआ है।
हरिद्वार स्थित विश्वप्रसिद्ध प्राचीन नारायणी शिला मंदिर में भगवान नारायण कंठ से लेकर नाभि तक एक शिला के रूप में विधमान है जिसके दर्शन करने और जल चढाने मात्र से ही मनुष्यो के पाप नष्ट हो जाते है। इस मंदिर में अपने पितरो का श्राद्ध करने से सौ पितृकुल का आशीर्वाद मिलता है। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित मनोज त्रिपाठी का कहना है कि यहाँ तिल, गंगाजल मिश्रि और दूध से तर्पण किया जाता है जिससे पितरो को तृप्ति प्रदान होती है। पिण्डदान के साथ साथ ब्राह्मण भोजन, गौदान, शैयादान करने से पितरो का आशीर्वाद प्राप्त होता है और मनोकामना पूर्ण होती है। इसके साथ साथ ये भी कहा गया है कि यदि कुछ भी न हो तो केवल दोनों हाथ उठाकर केवल पितरो को भावना से याद किया जाये तो भी पितृ प्रसन्न हो जाते है।
श्राद्ध पक्ष शुरू होते ही अपने पितरो को प्रसन्न करने के लिए दूर दूर से श्रद्धालु हरिद्वार पहुँच है और नारायणी सिला मंदिर में अपने पितरो की शांति के लिए पिंडदान और पूजा अर्चना कर रहे है। श्रद्धालुओं का कहना है कि इस मंदिर में पूजा अर्चना कर उन्हें असीम शांति का अनुभव होता है और इसलिए वो यहाँ पूजा करने के लिए हरिद्वार आते है।
वैसे तो साल भर नारायण शिला मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है लेकिन कहा जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान हमारे पितृ घर में पधारते है इसलिए श्राद्ध पक्ष के दौरान पितरो की पूजा की जाती है।

