हरिद्वार – शिवोपासना संस्थान के संस्थापक स्वामी रामभजन वन महाराज ने कहा कि नवरात्र के दिनों में मां भगवती के नौ रूपों की आराधना करने वाले मनुष्य के शक्ति और सामर्थ्य की वृद्धि होती है और नौ सिद्धियों की भी प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि शक्ति प्राप्त करने का अनुष्ठान है मां भगवती की आराधना। इसके लिए मनुष्य को मां भगवती की शरण में जाना होगा। मां भगवती की आराधना के लिए नवरात्र के दिन सर्वश्रेष्ठ दिन माने गए हैं। इन 9 दिनों तक मां भगवती की विधि विधान से आराधना करने से मनुष्य को मनवांछित फलों की प्राप्ति होती है, अंतर्मन नई शक्ति और ऊर्जा का संचार होता है, शक्ति और सामर्थ्य में वृद्धि होती है। ऐसा होने पर मनुष्य जीवन में आने वाली समस्याओं का सरलता से सामना कर सकता है।
स्वामी रामभजन वन महाराज ने नवरात्र की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि नवरात्र से अभिप्राय केवल जीवन की नौ रातें अथवा तो नौ दिवस नहीं अपितु जीवन की नवीन या नईं रात्रियाँ अथवा दिवस भी हैं। जीवन में काम, क्रोध, लोभ, मोह व अंधकार का समावेश ही घनघोर रात्रि के समान है जिसमें प्रायः जीव उचित मार्ग के अभाव में भटकता रहता है। हमारे शास्त्रों में अज्ञान और विकारों को एक विकराल रात्रि के समान ही बताया गया है। उन्होंने कहा कि इन दुर्गुण रूपी रात्रि के समन के लिए व जीवन को एक नईं दिशा, नईं उमंग, नया उत्साह देने की साधना काल का नाम ही नवरात्र है। माँ दुर्गा साक्षात ज्ञान का ही स्वरूप है ओर नवरात्र में माँ दुर्गा की उपासना का अर्थ ही ज्ञान रूपी दीप का प्रज्ज्वलन कर जीवन के अज्ञान के तिमिर का नाश करना है। स्वामी रामभजन वन महाराज ने कहा कि नवरात्रि सामान्य साधक के लिए शुद्धि के दिन है तो विशेष साधकों के लिए सिद्धि के दिन हैं। नवरात्र के प्रथम दिन माँ शैलपुत्री अर्थात पर्वत राज हिमालय की कन्या के रूप में जन्मी माँ पार्वती का पूजन किया जाता है। इसी प्रकार ब्रह्मचारिणी की दूसरे, चंद्रघंटा की तीसरे, कूष्मांडा की चौथे, स्कंदमाता की पांचवें, कात्यायनी की छठे, कालरात्रि की सातवें, महागौरी की आठवें और नवें दिन नवदुर्गा की आराधना की जाती है। अर्थात नौ दिनों तक मां भगवती की आराधना से मनुष्य के भीतर नई उर्जा और शक्ति का संचार होता है।

