हरिद्वार – गंगा पुत्र स्वामी निगमानंद की दसवीं पुण्यतिथि पर उन्हें याद किया गया। हरिद्वार के कनखल जगजीतपुर में स्थित मातृ सदन में आयोजित श्रद्धांजलि सभा व वेबिनार में देश के विभिन्न राज्यों से विविध क्षेत्रों में कार्य करने वाले बुद्धिजीवियों, पर्यावरणविदों, समाजशास्त्रियों, समाजसेवियों सामाजिक कार्यकर्ताओं, प्रकृति प्रेमियों, शिक्षाविदों, चिकित्सकों ने स्वामी निगमानंद को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की, साथ ही उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प किया।

वेबिनार में सम्मिलित हुए अतिथियों ने गंगा के निरंतर हो रहे दोहन पर अपने विचार व्यक्त किये। साथ ही यह भी माना कि कोरोना महामारी से बचने के लिए गंगा को बचाना सबसे महत्वपूर्ण है। मातृ सदन के संस्थापक एवं अध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि यदि समाज में किसी संत की इस प्रकार निर्मम हत्या कर दी जाए और न्याय के सारे दरवाज़े भी क्षीण हो जाएं तो अंत में प्रकृति स्वयं न्याय करती है और ऐसा हमें आज इस भीषण महामारी से प्रत्यक्ष देखने मिल रहा है। उन्होंने कहा कि कोरोना जैसी महामारी से बचने के लिए गंगा को बचाना बेहद जरूरी है।

पर्यावरणविद डॉ राजेन्द्र सिंह ने कहा कि प्रकृति की आज़ादी ही कोरोना का मुख्य इलाज है। मनोज मिश्रा ने गंगा और प्रकृति के ‘इकोसिस्टम रेस्टोरेशन’ की बात कही, और समाज के बुद्धजीवी वर्ग से यह अपील की कि वे संयुक्त राष्ट्र के इस प्रस्ताव को क्रियान्वित करें।

संदीप पांडेय ने कहा कि मातृ सदन के संन्यासियों द्वारा दिए गए बलिदान से सारे समाज को प्रेरणा लेनी चाहिये। डॉ विजय वर्मा ने कहा कि अगर कोरोना जैसा संक्रमण इतनी भीषण महामारी ला सकता है, तो प्रकृति अपने विकराल रूप में कितनी तबाही लाएगी, इसका अंदाज़ा लगाना भी मुश्किल है।

पर्यावरण के जानकार रवि चोपड़ा, रिद्धिमा पांडेय, सत्यनारायण बोलिसेट्टी, तापस दास, परितोष त्यागी, राज कुमार झा, मगनू झा, ब्रह्मचारी दयानंद, ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद आदि शामिल थे।

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