हरिद्वार, 25 मई – गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में पुरुषोत्तम मास के पावन एवं आध्यात्मिक संयोग के अवसर पर दो दिवसीय शिक्षक गरिमा शिविर का शुभारंभ हुआ। शिविर में उप्र कानपुर, लखनऊ, बनारस, मुरादाबाद, मेरठ, प्रयागराज सहित अनेक जिलों से आए 500 से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाएँ सहित गायत्री परिवार के सक्रिय कार्यकत्र्ता की उपस्थिति से शांतिकुंज परिसर राष्ट्र निर्माताओं के महाकुंभ में बदल गया। इस शिविर का उद्देश्य वर्तमान पीढ़ी को गढऩे वाले शिक्षकों को उनके गौरवशाली उत्तरदायित्व, सांस्कृतिक चेतना और नैतिक मूल्यों के प्रति पुनर्जाग्रत करना है।

शिविर के उद्घाटन सत्र को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने गुरु-शिष्य परंपरा और राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की अपरिहार्य भूमिका पर प्रकाश डाला। देवसंस्कृति विवि के प्रतिकुलपति डॉ पण्ड्या ने कहा कि शिक्षक केवल किताबी ज्ञान देने वाला माध्यम नहीं, बल्कि वह समाज का वास्तविक दर्पण होता है। युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी स्वयं शिक्षक गरिमा के मूर्त स्वरूप थे, जिनका संपूर्ण जीवन मानवता के कल्याण और राष्ट्र के वैचारिक पुनरुत्थान के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि सद्गुरु के बताए सन्मार्ग पर निष्ठापूर्वक कदम बढ़ाना ही वास्तविक अध्यात्म है। जो व्यक्ति अपने सद्गुरु के सिद्धांतों और आदर्शों को अपने आचरण में उतार लेता है, उसके जीवन में सौभाग्य का सूर्योदय निश्चित है। डॉ. पण्ड्या ने कहा कि आज की आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में नैतिक और मानवीय मूल्यों को समाहित करना समय की सबसे बड़ी मांग है।

शिविर के पहले ही दिन उत्तर प्रदेश से आए अनेक शिक्षकों ने इस आयोजन को अपने व्यक्तिगत जीवन का एक बड़ा टर्निंग पॉइंट (मोड़) बताया। इस अवसर पर शांतिकुंज व्यवस्थापक योगेन्द्र गिरि, परमानंद द्विवेदी, रामयश तिवारी सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

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