गोपाल रावत
हरिद्वार, 22 जुलाई – श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े ने हरिहर आश्रम कनखल हरिद्वार में आयोजित एक विशेष समारोह में शिवशक्ति धाम डासना के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी जी महाराज की शिष्या डॉ उदिता त्यागी को महामंडलेश्वर पद पर अभिषिक्त किया। उन्हें अब “महामंडलेश्वर यति मां प्रत्यंगिरा गिरी” के नाम से जाना जाएगा।

कनखल स्थित हरिहर आश्रम में हुए इस संस्कार में श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज, वरिष्ठ अध्यक्ष श्रीमहंत स्वामी प्रेम गिरी महाराज और अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत स्वामी महेश पुरी महाराज सहित कई संत उपस्थित रहे।

आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी ने डॉ उदिता त्यागी के सभी पारंपरिक संस्कार पूर्ण कराए और उन्हें नया नाम “प्रत्यंगिरा गिरी” प्रदान किया। इसके बाद उन्हें विधिवत महामंडलेश्वर घोषित किया गया। इस अवसर पर आचार्य महामंडलेश्वर ने कहा कि महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी महाराज श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े के अभिन्न अंग हैं और उनका संघर्ष सनातन धर्म की रक्षा के लिए है, जो एक संन्यासी का मूल कर्तव्य है। उन्होंने नव-नियुक्त महामंडलेश्वर से उनके गुरु के सिद्धांतों पर चलते हुए सनातन धर्म के लिए कार्य करने का आह्वान किया।

अभिषेक के बाद महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी महाराज ने घोषणा की कि अब से डॉ उदिता त्यागी को महामंडलेश्वर यति मां प्रत्यंगिरा गिरी कहा जाएगा। साथ ही उन्हें श्री महाकाली पीठ हनुमत धाम मुरादनगर का पीठाधीश्वर भी घोषित किया गया। नए पद की शपथ लेने के बाद महामंडलेश्वर यति मां प्रत्यंगिरा गिरी जी ने कहा, “जियूँगी तो सनातन धर्म के लिए और मरूंगी तो सनातन धर्म के लिए।”

हरिहर आश्रम में अभिषेक संपन्न होने के बाद नव-नियुक्त महामंडलेश्वर ने अपने गुरु और अन्य संतों के साथ माया देवी मंदिर और आनंद भैरव मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इस दौरान संतों ने सनातन धर्म की रक्षा के संकल्प दोहराए। महामंडलेश्वर यति मां प्रत्यंगिरा गिरी
(डॉ उदिता त्यागी) शैक्षणिक रूप से अत्यंत प्रतिभाशाली रही हैं। वह रुहेलखंड विश्वविद्यालय में सर्वोच्च अंक प्राप्त कर चुकी हैं और दो विषयों में पीएचडी हैं। इसके अलावा वह ब्यूटी कॉन्टेस्ट की विजेता भी रह चुकी हैं। महामंडलेश्वर बनने से पूर्व वह भाजपा से जुड़ी थीं और एक संभावित नेत्री के रूप में जानी जाती थीं। बाद में वह यूजीसी के मुद्दे पर सरकार की मुखर आलोचक बनीं।

महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी महाराज को विश्व में इस्लाम के मुद्दों पर मुखर संत के रूप में जाना जाता है। उन्होंने पिछले तीन दशकों में विभिन्न सरकारों के समक्ष हिंदुत्व के मुद्दे उठाए हैं। उनकी शिष्या को महामंडलेश्वर बनाकर अखाड़े ने यह संदेश दिया है कि वह “राजनीति से ऊपर उठकर” अपने संत के साथ खड़ी है और इस्लामिक जिहाद के विरुद्ध लड़ी जा रही वैचारिक लड़ाई में समर्थन देती है।

समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और संतजन उपस्थित रहे।

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