संपादक की कलम से
हरिद्वार – पिछले साल भारत में कोरोना का पहला संक्रमित मरीज़ मिला था, जिसके बाद से सरकार ने संक्रमण रोकने के लिए ने कहीं नाईट कर्फ्यू, कहीं कंटेन्मेंट जोन तो कहीं कर्फ्यू लगाया। लेकिन तमाम पाबंदियों के बावजूद कोविड 19 का संक्रमण नहीं रुका तो केंद्र सरकार ने आम लोगों की सुरक्षा को धयान में रखते हुए पूरे देश में लॉक डाउन का ऐलान कर दिया था। काफी लंबे चले लॉक डाउन का सार्थक प्रभाव भी दिखा, संक्रमण को रोकने में कामयाबी मिली। लेकिन लॉक डाउन की वजह से कई छोटी बड़ी इण्डस्ट्री बंद हो गई, लाखों लोगों की नोकरी चली गई, रोज कमाने खाने वालों के सामने तो दो वक्त की रोटी का संकट ही खड़ा हो गया। देश के हालात अभी सुधर ही रहे थे कि कोविड की दूसरी लहर ने एक ओर बड़ी चुनोती खड़ी कर दी है।
उत्तराखंड में भी कोविड से बिगड़े हालात अभी संभले भी नही थे कि कोविड की दूसरी लहर ने प्रदेश के सामने नई चुनोतियाँ उत्पन्न कर दी है। पिछले साल जनवरी 2020 में देश मे कोविड का पहला केस सामने आने के बाद से संक्रमण की कड़ी लगातार बढ़ती गई और पाबंदियां भी। हालाकिं 2020 में कुछ शर्तों के साथ प्रदेश में चार धाम यात्रा को श्रद्धालुओं के लिए चालू जरूर रखा गया। लेकिन संक्रमण की डर की वजह से श्रद्धालुओं की संख्या में काफी कमी रही, तो वहीं 2020 का कावड़ यात्रा, कई स्नान पर्वों को भी कोविड की वजह से स्थगित करना पड़ा। कोविड के कारण प्रदेश में आने के वाले पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं के लिए भी नियम कड़े किये गए, जिसका सीधा असर प्रदेश के टुरिज्म से जुड़े व्यपार पर हुआ, होटल व्यवसायी, ट्रांसपोर्टर, छोटे-बड़े कारोबारी सब काफी प्रभावित हुए। काम धाम चौपट होने से परेशान व्यपारियों को कुंभ 2021 से बहुत उम्मीदें थीं लेकिन कोविड की वजह से कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं के लिये भारत सरकार ने एसओपी जारी की। जिसके तहत कुंभ में आने के लिए कई तरह की शर्तें रखी गई, हालाकिं कुंभ के दौरान संक्रमण के मामले बढ़ने की वजह से बाद के कुछ स्नानों को वर्चुअल तरीके से करने का आवहान खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। प्रधानमंत्री के आह्वान पर कई अखाड़ों ने वर्चुअल स्नान करने पर सहमति जताई। वहीं एसओपी और कोरोना की दूसरी लहर की वजह से व्यपार के लिहाज से भी कुंभ फीका रहा। व्यपारियों की बची खुची उम्मीद अब चार धाम यात्रा से है, जो फिलहाल कोविड के बढ़ते ग्राफ की वजह से स्थगित किया गया है।
सरकार प्रदेश में कोविड के बढ़ते संक्रमण को रोकने की हर संभव कोशिश में जुटी है, प्रदेश में सख्ती के साथ कर्फ्यू को आगे बढ़ाते हुए अब 25 मई तक कर दिया गया है। कर्फ्यू के दौरान प्रदेश में कई तरह की पाबंदियां हैं, ऐसे में बाहर से आने वाले यात्री श्रद्धालु इन हालात में प्रदेश में आ नहीं सकते। ऐसे में अगर हालात जल्दी ठीक नहीं हुए तो चौपट पड़े व्यपार की स्थिति और दयनीय हो जाएगी, जिसका सीधा प्रभाव इससे जुड़े लोगों की आजीविका पर होगा।
कोविड भारत समेत दुनियां के कई देशों में कहर बनकर टूटा है, स्थिति कब तक और कैसे ठीक होगी किसी को नहीं पता, ऐसे में उत्तराखंड के व्यपारियों को यहां की सरकार से राहत की उम्मीद है, यह राहत कैसे और किस रूप में सरकार दे पाएगी यह तो समय बताएगा, लेकिन सच्चाई यही है कि कोविड से हालात जल्दी ठीक नहीं हुए तो आम लोग, व्यपारी और सरकार के सामने आर्थिक संकट जरूर खड़ा हो जाएगा।
ऐसी विकट परिस्थितियों में हर किसी की नज़र सरकार पर टिकी है, सरकार कोविड रोकने के लिए जो भी कड़े से कड़े कदम उठा सकती है जरूर उठाये, लेकिन वर्तमान स्थिति में प्रदेश के लोग और वयापारी भी चाहते हैं कि इस संकट की घड़ी में सरकार उन्हें भी थोड़ी राहत दे, क्योंकि उनकी भी आर्थिक स्थिति खराब हुई है।

