हरिद्वार, 13 सितंबर – गणेश चतुर्थी को लेकर हरिद्वार के बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। 14 सितंबर से दस दिवसीय गणेश उत्सव की शुरुआत होगी। बाजारों में भगवान गणेश की अलग-अलग आकार और स्वरूप की प्रतिमाएं पहुंच चुकी हैं। खास बात ये है कि इस बार भी पर्यावरण संरक्षण को लेकर मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं की मांग बनी हुई है।
गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की स्थापना के साथ दस दिवसीय गणेश उत्सव की शुरुआत होगी। हरिद्वार में भी गणेश उत्सव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। बाजारों में भगवान गणेश की अलग-अलग आकार और स्वरूप की प्रतिमाएं सजने लगी हैं। 100 रुपये से 50 हजार रुपये तक की मूर्ति बाजार में मौजूद हैं। अलग-अलग डिजाइन और आकार के साथ प्रतिमाओं को आकर्षक और जीवंत रूप देने के लिए कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
वहीं लोगों में भी गणेश उत्सव को लेकर काफी उत्साह दिख रहा है, विभिन्न बाजारों में गणेश जी की प्रतिमा लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।
वहीं नारायणी शिला मंदिर के मुख्य पुजारी और ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज त्रिपाठी ने बताया कि पवित्र नदियों में मूर्ति विसर्जन करना अनिष्टकारी होता है। महाराष्ट्र में तो मूर्ति विसर्जन की परम्परा है। लेकिन उत्तर भारत में ऐसा नहीं किया जाना चाहिए। उत्तर भारत तो भगवान गणेश का जन्मस्थल है। यहां विसर्जन की जगह भगवान स्थापित किये जाने चाहिए। भगवान गणेश मूर्तियों को घर में स्थापित करके सालभर उनका पूजन करना चाहिए।
