हरिद्वार, 12 जून – 28 मई को उत्तर प्रदेश के सम्भल निवासी पुष्पेंद्र द्वारा चौकी रोडिबेलवाल में आकर सूचना दी गई कि 27 मई को गंगा स्न्नान के लिए हरिद्वार आने के बाद उनका परिवार रात को हाथी पूल के निकट विष्णु घाट में एक पेड़ के नीचे सो गया। सुबह उठने पर उन्हे अपनी 04 महीने की बेटी गायब मिली। आसपास काफी तलाशने के बाद भी बच्ची का कोई पता नही चल पाया। बच्ची चोरी से जुड़े इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए उच्चाधिकारियों को जानकारी दी गई और तत्काल मुकदमा दर्ज किया गया। एसएसपी नवनीत सिंह ने बच्चों की सकुशल बरामदगी और मामले के खुलासे के लिए टीमों का गठन किया

कनखल व कलियर क्षेत्र से चोरी किए गए बच्चों की सकुशल बरामदगी एवं कथित बच्चा चोर गिरोहों के पर्दाफ़ाश के बाद हरिद्वार पुलिस ने अपना फोकस रोडिबेलवाला से चुराई गई बच्ची की रिकवरी पर केन्द्रित किया। बच्ची के चोरी होने का सही समय पता न होने के चलते पुलिस टीम ने अनुमानित समय सीमा के बीच की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटाते हुए एक संदिग्ध जोड़े की पड़ताल शुरु की। संदिग्ध जोड़ा पहले 27 मई को एक बच्चे को साथ लेकर विष्णु घाट पर घूमते हुए और फिर 28 मई की सुबह 02 बच्चों के साथ उ0प्र0 परिवहन निगम की बस में बैठेते हुए दिखे। बस के चालक/परिचालक से पूछताछ व अन्य पड़ताल से सामने आया कि ये जोड़ा धामपुर में बस से उतरा और फिर हावड़ा जाने वाली ट्रेन में बैठ गए। धामपुर से हावड़ा (प0बंगाल) के मध्य ट्रेन के 65 स्टेशन होने के कारण सभी स्टेशनों से जानकारी जुटाई गई लेकिन कोई भी लाभप्रद सूचना नहीं मिल पायी।

पुलिस ने उक्त संदिग्ध जोड़े के विष्णूघाट तक आने के रूट को किया जिसमें ये जोड़ा 27 मई को शिवालिक नगर क्षेत्र के ब्रह्मपुरी से आते हुये दिखाई दिये। उक्त संदिग्ध महिला-पुरुष की फोटो दिखाकर आस पास पूछताछ की गयी तो प्रकाश में आया कि वह दोनों अपने बच्चे सहित झाड फूंक का काम कर रहे एक बाबा की ब्रह्मपुरी क्षेत्र में बनी हुई झोपडी में रह रहे थे।

लीड मिलते हुए पुलिस टीम ने तुरंत झोपडी में दबिश देकर संदिग्ध बाबा सत्यपाल और तलाशे जा रहे महिला और पुरुष को बच्ची सहित पकड़ लिया। मिलान करने पर उक्त बच्ची वहीं 04 माह की बच्ची निकली जिसका अपहरण किया गया था। उपरोक्त घटना के अनावरण में चौकी प्रभारी रोड़ी बेलवाला नवीन सिंह चौहान, हेड कांस्टेबल सतीश नौटियाल, कांस्टेबल निर्मल रागढ़ का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सीआईयू कार्यालय से कांस्टेबल वसीम ने टेक्निकल इनफॉरमेशन प्राप्त करने एवं प्रक्रिया करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

संदिग्ध जोड़े ने पूछताछ करने पर बताया कि वह आपस में पति-पत्नी हैं और चार बच्चों के माता-पिता हैं जिनमें तीन लड़के और एक लड़की शामिल है। कुछ समय पहले महिला के चचेरे भाई ने उसे बताया था कि 05 लड़कियां पैदा होने के बाद एक दंपत्ति को बेटे की जरुरुत है। अगर वह अपना एक बेटा दे दे तो बदले में तीन लाख रुपये मिलेंगे। महिला ने अपना बच्चा देने से मना कर दिया लेकिन बड़ी रकम के लालच में उसने यह बात अपने परिचित सत्यपाल (बाबा) को बतायी। हरिद्वार में लाखों लोगों की भीड़ में घाटों से बच्चे चुराने की सत्यपाल की सलाह पर ही दंपत्ति अपनी छोटी को साथ लेकर 26 मई को इटावा व लखनऊ से होते हुये ट्रेन से हरिद्वार पहुंचे थे। एक दिन व रात सत्यापाल की झोपड़ी में रुकने के बाद 27 मई को छोटी बेटी को साथ लेकर हरिद्वार घाट मे गये और बच्चे चोरी करने का मौका तलाशने लगे। अगली सुबह 4.00 बजे के लगभग उन्होंने गहरी नींद मे सो रहे एक परिवार के बीच से उस बच्ची को गलती से लडका समझकर चोरी कर लिया।

चुराए गए बच्चे की लड़की होने की बात पता चलने पर दंपत्ति सत्यपाल के कहने पर अपने घर जाने के लिए रेलवे स्टेशन पहुंचे लेकिन ट्रेन न मिलने पर बस मे धामपुर गये और वहां से ट्रेन में बैठकर लखनऊ तथा उसके बाद अपने गांव नगरिया चले गये। अपनी बच्ची को घर छोड़कर दंपत्ति सत्यपाल के कहने पर चुराई गई बच्ची को किसी और को बेचने के इरादे से हरिद्वार सत्यपाल की झोपड़ी पर पहुंचे और पकड़े गए।

पुलिस टीम –
1- प्रभारी निरीक्षक कुंदन राणा
2-व0उ0नि0 गोपाल भट्ट
3-उ0नि0 नवीन चौहान
4-उ0नि0 संजीत कंडारी
5-उ0नि0 नवीन नेगी
6-उ0नि0 ऋषिकांत पटवाल
7-उ0नि0 विक्रम बिष्ट
8-है0का0 सतीश नॉटियाल
9-है0का0 संजयपाल
10-है0का0 संजीव राणा
11-का0 निर्मल
12-का0 सुनील चौहान
13-का0 अजित तोमर
14-का0 राकेश
15-का0 जसवंत बहादराबाद

तकनीकी टीम –
1- CIU प्रभारी नरेन्द्र बिष्ट
2- का0 वसीम
3- का0 हरवीर
4- का0 द्वीप गौड़
5- का0 नरेंद्र
6- का0 उमेश

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