हरिद्वार- पितृपक्ष श्राद्ध आज से शुरू हो गए हैं। 16 दिनों तक चलने वाले पितृ पक्षों में लोग अपने दिवंगत पितरों के मोक्ष की कामना करते हैं। हरिद्वार के नारायणी शिला मंदिर में श्राद्ध कर्म करने का खास महत्व है। यहां दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
हिंदू धर्म में पितरों को बहुत मान सम्मान दिया जाता है। 16 दिनों के श्राद्ध पक्ष अपने पितरों की मोक्ष की कामना करने का समय होता है। देश भर में कई स्थानों पर श्राद्ध कर्म किए जाते हैं लेकिन बिहार के गया तीर्थ, हरिद्वार के नारायणी शिला मंदिर और बद्रीनाथ में श्राद्ध करने का खास महत्व बताया जाता है। शास्त्रों में वर्णन है कि बद्रीनाथ धाम में भगवान विष्णु का शीश स्थित है जबकि हरिद्वार के नारायणी शिला में धड़ और गया तीर्थ में भगवान के चरण स्थापित है। इसलिए इन तीन स्थानों पर तर्पण करने का महत्व ज्यादा है।
पितृपक्ष में तर्पण करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु नारायण शिला मंदिर पहुंचने हैं और तीर्थ पुरोहितों द्वारा कराई जाने वाली विशेष पूजा से अपने पितरों के मोक्ष की कामना करते हैं। तीर्थ पुरोहित अपने यजमानों से तर्पण कराते हैं।
16 दिनों तक चलने वाले पितृपक्षों में नारायणी शिला मंदिर में देश भर के कई राज्यों से पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का ताता लगा रहता है और आज से यह शुरुआत हो गई है।

