हरिद्वार, 15 सितंबर – उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जन्मदिन के अवसर पर राजमंत्री सुनील सैनी ने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का जन्मदिन नहीं है बल्कि उस संकल्प का दिन है जिसने उत्तराखंड की राजनीति में ‘सादगी’ और ‘सेवा’ को नए मायने दिए हैं।
राज्य मंत्री सुनील सैनी ने कहा, मुख्यमंत्री के नाते जब मैं उनके व्यक्तित्व की ओर देखता हूँ तो मुझे एक ऐसा चेहरा नजर आता है जो सत्ता की चकाचौंध से कोसों दूर, आज भी अपने भीतर के उस ‘कार्यकर्ता’ को जीवित रखे हुए है जिसने कभी खटीमा की गलियों में भाजपा का झंडा बुलंद किया था। एक कार्यकर्ता का समर्पण जिसने पुष्कर सिंह धामी को शून्य से शिखर तक पहुँचाया।
सुनील सैनी ने कहा, पुष्कर सिंह धामी का जीवन भाजपा के हर उस कार्यकर्ता के लिए एक खुली किताब है जो मेहनत और ईमानदारी में विश्वास रखता है। उन्होंने राजनीति में कोई शॉर्टकट नहीं अपनाया। संगठन के एक साधारण कार्यकर्ता से लेकर विधायक, राज्य मंत्री, और अब मुख्यमंत्री के पद तक का उनका सफर इस बात का प्रमाण है कि भाजपा में प्रतिभा और निष्ठा का सम्मान होता है। मुझे याद है जब वह संगठन के कार्यों के लिए प्रवास पर निकलते थे तो वह कभी सुख-सुविधाओं की परवाह नहीं करते थे। उनका भाजपा के प्रति यह समर्पण अटूट है।
उन्होंने कहा, सत्ता अक्सर इंसान और आम जनता के बीच दीवारें खड़ी कर देती है लेकिन पुष्कर सिंह धामी ने उन दीवारों को गिरा दिया है। उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उनकी सहजता में रत्ती भर बदलाव नहीं आया। आज भी वह उसी गर्मजोशी से मिलते हैं जैसे वर्षों पहले मिलते थे। उनके साथ का एक अनुभव मुझे सदा याद रहता है। एक बार कार्यक्रम के दौरान भारी भीड़ थी, सुरक्षा घेरा सख्त था। तभी उन्होंने दूर खड़े एक पुराने कार्यकर्ता को पहचान लिया। उन्होंने तुरंत सुरक्षाकर्मियों को रुकने का इशारा किया, खुद चलकर उस कार्यकर्ता के पास गए और कंधे पर हाथ रखकर पूछा, “ताऊ, घर-बार ठीक है न?” यह कोई राजनीतिक दिखावा नहीं था, यह उनकी असलियत है। वह दिल से लोगों से जुड़ते हैं, इसलिए आज प्रदेश का हर युवा और बुजुर्ग उन्हें ‘अपना धामी’ कहता है।
मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल ‘नॉन-स्टॉप उत्तराखंड’ की अवधारणा को चरितार्थ कर रहा है। एक कुशल प्रशासक के रूप में उन्होंने निर्णय लेने में जो तेजी दिखाई है वह सराहनीय है। मुख्यमंत्री का मानना है कि फाइलें सचिवालय की मेजों पर नहीं बल्कि धरातल पर समाधान बनकर पहुँचनी चाहिए। सभी फसलों को एम.एस.पी. पर खरीदने का ऐतिहासिक निर्णय हो या किसानों के मुआवजे की त्वरित अदायगी, उन्होंने साबित किया कि वह किसान के बेटे हैं। बिना खर्ची-बिना पर्ची के पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियां देना उनकी प्राथमिकता रही है। उनका नेतृत्व ‘लोहे की मुट्ठी’ और ‘रेशम के स्पर्श’ का मिश्रण है। जहाँ वह भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ सख्त हैं, वहीं प्रदेश की जनता के दुख-दर्द के प्रति अत्यंत संवेदनशील भी।
उत्तराखंड को शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और बुनियादी ढाँचे में नंबर वन बनाने की उनकी ललक उन्हें चैन से बैठने नहीं देती। वह 24 में से 18-18 घंटे काम करते हैं और उनके चेहरे पर थकान की जगह मुस्कान रहती है। मैं उनके जन्मदिन पर भगवान श्री कृष्ण से प्रार्थना करता हूँ कि वह हमारे मुख्यमंत्री को दीर्घायु प्रदान करें और उनका मार्गदर्शन उत्तराखंड को प्रगति के नए सोपानों पर ले जाए। पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड न केवल विकसित भारत का सारथी बनेगा बल्कि एक खुशहाल प्रदेश के रूप में विश्व पटल पर अपनी पहचान बनाएगा।
