नई दिल्ली, 12 अक्टूबर – भारतीय जनता पार्टी के लोकसभा सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने आज नई दिल्ली स्थित पाटी के केंद्रीय कार्यालय में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए राहुल गांधी पर चुनाव आयोग, न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाओं पर निराधार आरोप लगाकर अराजकता फैलाने का आरोप लगाया। अनुराग ठाकुर ने कहा कि राहुल गांधी वोट चोरी के आरोपों के समर्थन में प्रमाण प्रस्तुत करें और बताएं कि किस मतदाता का अधिकार छीना गया। उन्होंने कांग्रेस के आपातकाल, जबरन नसबंदी और लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का उल्लेख करते हुए विपक्ष के दोहरे रवैये पर सवाल उठाए।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी से अमर्यादित भाषा छोड़कर तथ्यों, प्रमाणों और लोकतांत्रिक जवाबदेही के आधार पर राजनीति करने का आग्रह किया। अनुराग ठाकुर ने कहा कि राहुल गांधी कहने के लिए तो नेता प्रतिपक्ष हैं, लेकिन उन्हें न तथ्यों का पता है, न तर्कों का और न ही नियम-कायदों व कानून का। उन्हें बस यह पता है कि अराजकता कैसे फैलानी है, अस्थिरता कैसे लानी है, संवैधानिक पदों और संस्थाओं को नीचा कैसे दिखाना है तथा दुनिया भर में भारत का नाम बदनाम करके देश की छवि को कमजोर कैसे करना है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश को आज इतने अस्थिर, अराजक और अगंभीर नेता प्रतिपक्ष के तमाशे और नखरे झेलने पड़ रहे हैं। राहुल गांधी के लबों पर वोट चोरी का आरोप रहता है, जबकि दरअसल वे जनादेश से सीनाजोरी कर रहे हैं। राहुल गांधी की राजनीति का पूरा पैटर्न ही हवा हवाई है। हम तो कहेंगे कि राहुल गांधी हवा हवाई नेता हैं। उनकी बातें, आरोप, हरकतें, प्रदर्शन, तथ्य, तर्क और आंकड़े, सब कुछ हवा हवाई है। जबकि धरातल और असलियत में शून्य बटे सन्नाटा है। राहुल गांधी बार-बार आरोप लगाते हैं और फिर अदालत में जाकर माफी मांगते हैं। यह उनका ट्रैक रिकॉर्ड है। हम इतना ही कहेंगे कि “धूल चेहरे पर थी और वे आईना साफ करते रहे।”

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 99 चुनाव हारने के बाद भी राहुल गांधी हर सीजन में यही देखते हैं कि किस पर आरोप लगाना है और ठीकरा कहां फोड़ना है। कभी चुनाव आयोग, कभी ईवीएम, कभी मुख्य चुनाव आयुक्त, तो कभी किसी और को निशाना बनाया जाता है। अब तो स्थिति यह हो गई है कि राहुल गांधी सड़क छाप भाषा का प्रयोग कर रहे हैं और निराधार आरोप लगा रहे हैं। मगर राहुल गांधी, देश को शोर नहीं, सच चाहिए; आरोप नहीं, प्रमाण चाहिए और राजनीतिक बयान नहीं, स्पष्ट जवाब चाहिए। राहुल गांधी महामहिम राष्ट्रपति जी के पास गए, जहां उनसे शिकायत के साथ सबूत देने को कहा गया। लेकिन राहुल गांधी वहां भी बगलें झांकने लगे, भाग गए और चुप्पी साध ली। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने भी राहुल गांधी से साफ-साफ कह दिया कि वे न्यायालय को अपनी राजनीति का रणक्षेत्र नहीं बना सकते।

अनुराग ठाकुर ने कहा कि अब तो राहुल गांधी को यह भी सिखाना पड़ेगा कि किसी मामले की सुनवाई चल रही हो, तो अदालत और मुख्य न्यायाधीश से संपर्क करने की प्रक्रिया क्या होती है। अब राहुल गांधी मुख्य न्यायाधीश से मिलने की बात करने लगे हैं, जबकि मामला अदालत में विचाराधीन है। दरअसल, कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी देश की न्यायिक व्यवस्था को धमकाने की कोशिश कर रहे हैं कि यदि हमारी बात नहीं मानी गई, तो हम आपके खिलाफ भी सड़कों पर उतर आएंगे। इस पर अदालत ने भी कहा कि उन्हें याचिका दायर करनी होगी। राहुल गांधी पहले भी कई बार अदालत में माफी मांग चुके हैं। अब उन्हें लगता है कि वे सड़कों पर जाकर बार-बार झूठ बोलेंगे और उसे दोहराएंगे, तो लोग उसे सच मान लेंगे। राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी का फंडा बिल्कुल स्पष्ट है – राज नहीं तो अराजकता फैला दो। देश की जनता को अदालत के सामने अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। राहुल गांधी को भी अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। लेकिन राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी अपने आपको एक अतिरिक्त-संवैधानिक संस्था मानते हैं। नेहरू-गांधी परिवार और कांग्रेस पार्टी खुद को नियम, कानून और संविधान से ऊपर मानते हैं।

अनुराग अनुराग ठाकुर ने कहा कि यह वही परिवार और पार्टी है, जिन्होंने देश को अपनी जागीर मानकर रखा है। राहुल गांधी जिस संविधान को हाथ में लेकर चलते हैं, उस संविधान को आपातकाल के समय कांग्रेस के दमन से बचाने का प्रयास देश की जनता, भाजपा और कई अन्य दलों ने किया था। कांग्रेस ने तो संविधान को कुचलने का काम किया।

लोकतंत्र में विरोध करने का अधिकार है, लेकिन जनादेश को बदनाम करने का लाइसेंस नहीं है। इसलिए हम राहुल गांधी और विपक्षी दलों से कहना चाहते हैं कि आरोपों की राजनीति बंद करें और प्रमाणों के साथ बात करें। सबूत प्रस्तुत करें और निराधार आरोप लगाने, गंदे शब्दों तथा अमर्यादित भाषा का प्रयोग बंद करें। यह देश के नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए उचित नहीं है। राहुल गांधी सड़क छाप राजनीति और हवा हवाई बातें करना बंद करें।

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